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जल विवाद पर फिर टला फैसला, बढ़ाया गया महानदी ट्रिब्यूनल का कार्यकाल, अब जनवरी 2027 तक आएगा फैसला

रायपुर। Mahanadi Water Dispute: ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल बंटवारे को लेकर जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए गठित ‘महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल’ का कार्यकाल एक बार फिर बढ़ा दिया गया है। केंद्र सरकार ने ट्रिब्यूनल को अपनी अंतिम रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत करने के लिए 9 महीने का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। अब ट्रिब्यूनल को 13 जनवरी, 2027 तक अपना फैसला सुनाना होगा।

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जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, इस देरी का मुख्य कारण ट्रिब्यूनल में कोरम (गणपूर्ति) की कमी रहा। मार्च 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर के त्याग पत्र देने के बाद नए अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक लगभग 9 महीने की अवधि तक ट्रिब्यूनल का कामकाज ठप रहा। इसी ‘नॉन-फंक्शनल’ अवधि की भरपाई के लिए ट्रिब्यूनल ने केंद्र सरकार से विस्तार का अनुरोध किया था।

महानदी और उसकी नदी घाटी से संबंधित जल विवादों के निपटारे के लिए इस अधिकरण का गठन 12 मार्च, 2018 को किया गया था। इसे मूल रूप से तीन साल के भीतर यानी 11 मार्च, 2021 तक अपनी रिपोर्ट देनी थी। हालांकि, विभिन्न कारणों से इसकी समय सीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है।

• कोविड महामारी: मार्च 2020 से जून 2021 तक की 16 महीने की अवधि को महामारी के कारण ‘गैर-कार्यात्मक’ माना गया।

• प्रभावी तिथि में संशोधन: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर, ट्रिब्यूनल के गठन की प्रभावी तिथि 14 दिसंबर, 2019 मानी गई, जो इसकी पहली नियमित सुनवाई की तारीख थी।

• पिछला विस्तार: इससे पहले केंद्र ने कार्यकाल बढ़ाकर 13 अप्रैल, 2026 तक कर दिया था।

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Mahanadi Water Dispute: नया विस्तार 14 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रदीप कुमार अग्रवाल द्वारा हस्ताक्षरित इस अधिसूचना के बाद अब यह स्पष्ट है कि महानदी के पानी को लेकर चल रहे विवाद का कानूनी समाधान अगले साल की शुरुआत तक ही संभव हो पाएगा। यह विवाद विशेष रूप से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों राज्यों की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक महानदी पर निर्भर है।

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