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अक्षय तृतीया पर जेवरों की खरीदारी के समय इन बातों का रखें खास ध्यान, वरना झेलना पड़ेगा भारी नुकसान

नई दिल्ली। पूरे देश में आज ईद और अक्षय तृत्या का त्यौहार एक ही दिन मनाया जा रहा है। हर अक्षय तृतीया पर सोना चांदी और गहने खरीदने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन सोने हीरे को खरीदना शुभ माना गया है। यह परंपरा अब फैशन का रूप ले चुकी है। हालांकि सोने के जेवर हों या हीरे के कुछ बातों का ध्यान रखना होगा आवश्यक। इन बातों का ध्यान रखने से आप भारी नुकसान से बच सकते हैं।

मिलावटी जेवरों से रहें सावधान

गहनों में मोम और चपड़ी जैसी चीजें मिलायी जाती हैं और जब ग्राहक गहने खरीदता है तो वह इन मिलावटी चीजों को भी सोने के भाव में ले आता है और जब वह बेचने जाता है तो ज्वेलर इन्हें हटाकर दाम लगाते हैं। जिससे भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। बताया जा रहा है कि हार, मंगलसूत्र आदि में सोने के दाने, घुंघरू या फुलावट के डिजाइन भी होते हैं. उनमें चपडी या मोम भरा हुआ होता है। आपको गहने बदलवाने या वापस बेचते समय 10% से 30% फीसद तक का नुकसान हो सकता है. तो अगली बार सोना खरीदते समय इस बात का खास ध्यान रखें।

सोने के दाम पर न ख़रीदे सस्ते अमेरिकन डायमंड

इसके बाद आती है नगीने की बारी। ज्वेलरी में लगे जगमग नगीने उसकी सुंदरता बढ़ाते हैं. सोने की ज्वेलरी में लगने वाले नगीने विशेष तौर पर भारी बनाए जाते है। अंगूठी और टॉप्स में इन भारी भरकम नगीने का इस्तेमाल किया जाता है। सोने की ज्वेलरी में 5 से 15 प्रतिशत तक नगीनों का वजन हो सकता है। नाक में पहने जाने वाले कांटों और लवंग में तो नगीनों का वजन 50% तक भी हो सकता है।

मीनाकारी का काम कर सकता है जेब हल्की

मीनाकारी से सोने के गहने और भी सुंदर हो जाते हैं, लेकिन यह मीनाकारी आपकी जेब पर भारी पड़ती है। मीनाकारी करते समय जिन रंगों का उपयोग होता है, जिसे आप सोने के दाम पर खरीदते हैं। सामान्य रूप से ये वजन 5 से 12% तक होता है, जिसका कोई मूल्य गहने बेचते या बदलते समय वापस नहीं मिलता है। गहने खरीदते समय इस बात का ध्यान रखा जाना बहुत जरुरी है।

हीरा खरीदते समय रखें इस बात का रखें खास ध्यान

हीरा सदा के लिए तो है लेकिन इसकी खरीदारी करते समय भी कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. हमेशा हीरा 0.9 कैरेट, 1.9 कैरेट आदि के हिसाब से ही लेना चाहिए। 1 कैरेट के हीरे और 0.9 कैरेट की कीमत में 50 हजार रुपये का अंतर तक हो सकता है, जबकि दिखने में कोई फर्क नही पड़ता है. जिस प्रकार गोल्ड में हॉलमार्क होता है, उसी प्रकार हीरे GIA सर्टिफाइड होते हैं, जिसमें उनके कट और रंग के हिसाब से D से Z तक मार्किंग होती है. ये मार्किंग लेजर की मदद से बनाए जाते है, जिन्हें आप GIA की वेबसाइट पर जाकर कन्फर्म कर सकते हैं।

हॉलमार्क का होना जरुरी

सोना या सोने के गहने खरीदने से पहले हॉलमार्क जरूर चेक करना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता का पता चलता है. इसके तहत अमूमन 18 कैरेट से 22 कैरेट तक की ज्वेलरी बिकती है. 22 कैरेट में 92% सोना और 18 कैरेट में 75% प्रतिशत सोना होता है। 24 कैरेट विशुद्ध सोना होता है, जो इतना लचीला होता है कि गहने ही न बन पाएं। इसलिए हॉलमार्क जरूर चेक करें। इसके साथ ही हॉलमार्क की उस संख्या को बिल में जरूर लिखवाना चाहिए। हर ज्वेलरी का एक यूनिक HUID नंबर होता है, जो BIS के आगे लिखा होता है.इससे इस बात की श्योरिटी हो जाती है कि आपने सोना जहां से भी लिया है, वह उसे फिर से खरीद लेगा।

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