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जीवन जीने की कला सत्गुरु के चरणों में बैठ कर ही आती है – संत बहन शारदा कुहीकर…

रायपुर : संत निरंकारी मिशन की ब्रांच रायपुर में ज़ोनल महिला निरंकारी संत समागम का आयोजन मारुति मंगलम भवन में किया गया। नागपुर से आई संत बहन शारदा कुहीकर जी ने अपने प्रवचन में फ़रमाया कि जीवन जीने की कला सत्गुरु के चरणों में बैठ कर ही आती है। आज महिला होना गर्व की बात है।नारी एक पावन नदी की तरह होती है नदी और नारी यदि मर्यादा में रहे तो अनेक सुख देती है।नारी पूरे परिवार को अपनी सेवाभावना से प्यार की डोर में बाँध कर रखती है।नारी के अनेक रूप हैं वो ममतामई माँ है ,प्यार करने वाली बहन है,जीवनसाथी के रूप में पत्नी है , बेटी है, भाभी है, चाची है, मामी है ,बुआ है ,मौसी है सभी रूपों में नारी समाज में विशेष दर्जा रखती है। बच्चों को संस्कार देने में नारी के महत्व को सारा संसार मानता है। नारी देवीय शक्ति के रूप में संपूर्ण विश्व में पूजनीय है।

नारी के स्वभाव से ही घर का वातावरण स्वर्ग जैसा सुंदर बनता है।

कार्यक्रम में भाटापारा तिल्दा राजिम महासमुंद रायपुर कोशलपुर बलौदबाज़र भानपुरी लोरमी मूँगेली रायगढ़ आदि स्थानों से महिलाओं ने पहुँचकर भक्ति से भरपूर रचनायें गीत क़व्वाली एवं नाटिकाओं के माध्यम से सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के संदेश को पहुँचाया।
हिन्दी सिंधी मराठी छत्तीसगढ़ी पंजाबी अंग्रेज़ी आदि भाषाओं का सहारा लेकर संत बहनों ने कार्यक्रम में निरंकारी मिशन की शिक्षाओं को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया।

सेवादल की अधिकारी बहनों आदरणीय बहन किरण पृथ्वानी जी सपना शादीजा एवं नीलम पृथ्वानी जी ने सेवादल द्वारा कार्यक्रम की सुंदर व्यवस्था बनाने के लिए सम्पूर्ण सेवादल का धन्यवाद किया। रायपुर ब्रांच के ज़ोनल इंचार्ज ने सभी बहनों के द्वारा दी गई प्रस्तुति के लिए उनका आभार प्रकट किया और कहा कि आज की नारी समाज के प्रत्येक क्षेत्र में अपना सकारात्मक सहयोग दे रही है।

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