छत्तीसगढ़

गांजा तस्करी मामले में छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने आरोपी को किया दोषमुक्त, पढ़ें क्या है पूरा मामला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गांजा तस्करी मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस रजनी दुबे की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। बैंच ने माना कि जिस मौखिक साक्ष्य और दस्तावेज पर निचली अदालत ने पुलिस जांच की तारीफ की है, वह बनावटी है।

डिवीजन बेंच ने माना है कि मादक पदार्थ अधिनियम के तहत गांजा की जब्ती आरोपी के कब्जे से होनी चाहिए। पुलिस को यह पता ही नहीं है कि जिस घर से गांजा जब्त करने का दावा किया गया है वह घर आरोपी का ही नहीं है। न ही वह उस घर में कभी रहा है। पुलिस की जांच में लापरवाही का यह मामला बिलासपुर के सीपत थाना क्षेत्र का है।

सीपत के तत्कालीन थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह परिहार ने अपनी टीम के साथ 3 अगस्त 2011 को आवासपारा के मकान में दबिश दी थी। जहां झोपड़ी में धनसाय पटेल (41) के पास से 67 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद करने का दावा किया गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया था। ट्रायल कोर्ट ने पुलिस की जांच और आरोप पत्र के आधार पर मादक पदार्थ गांजा रखने और तस्करी करने के आरोप में धनसाय को 21 फरवरी 2014 को 15 साल कैद और दो लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।

धनसाय ने अपने अधिवक्ता शैलेंद्र दुबे के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। अपील के अनुसार वह मूलत: रायपुर जिले के ग्राम टुंड्रा का रहने वाला है और वर्तमान में बिलासपुर के सीपत स्थित आवासपारा में परिवार सहित रहता है। आरोप लगाया गया कि सीपत पुलिस ने आवासपारा के एक झोपड़ी से पांच बोरी में 67 किलो 600 ग्राम गांजे की जब्ती बनाई थी। इसके बाद याचिकाकर्ता पर गांजा बेचने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई कर दी।

उसके वकील ने पुलिस की ओर से कोर्ट में प्रस्तुत आरोप पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस ने जिस झोपड़ी से गांजा की जब्ती बनाई है। वह झोपड़ी उसकी नहीं है और न ही वह उस झोपड़ी में रहता है। उसने झोपड़ी को कभी किराए से भी नहीं लिया है। पुलिस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस झोपड़ी से पांच बोरी में गांजा जब्ती करने का दस्तावेज पुलिस ने पेश किया है वह टूटी फूटी हुई है। उसमें दरवाजा भी नहीं है।

अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पुलिस से भी जवाब मांगा। जिसमें पुलिस यह भी नहीं बता पाई कि जिस झोपड़ी से गांजा की जब्ती बनाई है वह याचिकाकर्ता का ही है या नहीं। सभी पक्षों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान उठाते हुए विशेष कोर्ट के फैसले को रद कर दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस यह साबित करने में विफल है कि जिसे उसने गांजा तस्करी का आरोपी बनाया है वह उस मकान में किराए लेकर कब्जे पर था। पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि वह मकान आरोपी का है या नहीं। ऐसे में यह भी साबित नहीं किया जा सकता कि जब्त गांजा आरोपी के कब्जे में था। लिहाजा, आरोपी संदेह के लाभ के सिद्धांत का हकदार है। कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

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