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हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद भी शिक्षकों को संशोधित शाला कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा रहा…

रायपुर : माननीय हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद शिक्षकों को संशोधित शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा रहा । 10 दिन के भीतर ज्वॉइन करने के दिए थे आदेश पंरतु 25 दिन बीत जानें के बाद भी अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया, इसलिए शिक्षक वह दर-दर भटकने के मजबूर हैं ,ओर न ही उनको वेतन दिया जा रहा

क्यों हुआ पदोन्नति उपरांत संशोधन-
मई 2023 में शिक्षकों का पूर्व माध्यमिक शाला में पदोन्नति काउंसलिंग के माध्यम से किया गया । काउंसलिंग के समय जानबुझकर पदों को छिपाकर से 150- 200 किलोमीटर पोस्टिंग दी गई। इसके बाद स्थापना में संशोधन हेतु संयुक्त संचालक द्वारा आवेदन मंगाया गया। शिक्षकों द्वारा आवेदन पत्र कार्यालय में जमा किया गया, उनके कारणों पर विचार करते हुए संयुक्त संचालक द्वारा पदस्थापना में संशोधन आदेश जारी किया गया ओर शिक्षक संशोधित शाला में कार्यभार ग्रहण कर 03 माह तक नियमित रूप से अध्यापन करा रहे थे।

संशोधन निरारस्तीकरण
4 सितंबर 2023 को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नति में किए गए संशोधन को निरस्त किया गया। उन्हें काउंसलिंग में दी गई संस्था में पदभार ग्रहण करने हेतु 10 दिन का समय दिया गया । इन 10 दिनों के भीतर यदि शिक्षक कांसिलिंग शाला में ज्वाइन नहीं करते हैं तो उनकी पदोन्नति निरस्त मनी जावेगी।

संशोधन निरस्तीकरण के विरूद्ध दायर याचिका

संशोधन निरस्तीकरण आदेश के विरुद्ध सभी शिक्षक माननीय उच्च न्यायालय की शरण में गए, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 11 सितंबर 2023 को यथा स्थिति बनाए रखने की आदेश पारित किया।
मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2023 को हुई। इसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दो आदेश दिए गए, जिसमें पहला आदेश यह था कि एक कमेटी का गठन किया जाए जो की संशोधन के कारणों का परीक्षण करेगी। दूसरा आदेश यह था कि इन्हें पूर्व संस्था में यानी कांसिलिंग संस्था कार्यभार ग्रहण कराया जावे।

पूर्व संस्था(संशोधित शाला ) में कार्यभार ग्रहण नहीं कराये जाने के पीछे विभाग का तर्क

माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद भी विभाग द्वारा कमेटी का गठन तो किया गया परंतु उन्हें पूर्व संस्था यानी कि संशोधित संस्था में कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया। इसके लिए विभाग ने महाधिवक्ता से अभिमत लिया , उनके अनुसार पूर्व संस्था का मतलब काउन्सलिंग में प्राप्त संस्था बताया गया, और इनके अभिमत के आधार पर शासन द्वारा कांसिलिंग संस्था में कार्यभार ग्रहण कराए जाने हेतू पत्र जारी किया गया

संशोधित शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं कराए जाने पर पुनः माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर
इसके पश्चात शिक्षकों ने पुनः माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जिसकी सुनवाई 5 दिसंबर 2022 को हुई इसमें माननीय न्यायालय द्वारा स्पष्ट किया गया कि शिक्षकों की पूर्व संस्था उनकी संशोधित शाला मानी होगी और 10 दिवस के भीतर उनका कार्यभार ग्रहण करवा जावे।

विभाग क्यों नहीं करा रहा कार्यभार ग्रहण
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के पालन करने की बजाय विभाग द्वारा न्यायालय में एमसीसी दायर कर दिया गया है , जिसमें ऑर्डर का पालन करने हेतु 15 दिवस का अतिरिक्त समय की मांग की गई। जिसकी सुनवाई 03 जनवरी 2024 को होनी है। इसके पहले कार्यभार ग्रहण ऑर्डर जारी किया जाना था, जो कि नहीं किया गया, विभाग के अधिकारीयों द्वारा यह कहना है की उन्हें न्यायलय से अतिरिक्त समय मिला है, जबकि न्यायायल उन्हे किसी भी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया है। फिल्हाल न्यायायल द्वारा उन्हें दिया गया समय समाप्त हो चुका है.

सरगुजा, बस्तर और दुर्ग सम्भाग में हो चुका सभी शिक्षकों कार्यभार ग्रहण परन्तु बिलासपुर और रायपुर में आज तक ज्वाइनिंग नहीं
5 दिसंबर 2023 के आदेश के तहत राज्य के तीन संभागों में शिक्षकों को संशोधित शाला में कार्यभार ग्रहण कराया जा चुका है एवं वेतन भी भुगतान कर दिया गया है, परंतु रायपुर एवं बिलासपुर संभाग के अधिकारियों द्वारा विभाग का आदेश नहीं होने का हवाला देते हुए कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा रहा है.

बिलासपुर DEO ने कहा जो सीधे स्कूलों में ज्वाइनिंग किए उनका ज्वाइनिंग मान्य नहीं होगा
बिलासपुर जिले के दर्जनों शिक्षकों द्वारा माननीय न्यायालय के आदेश को मानते हुए सीधे अपने स्कूलों में उपस्थिति दी गई, एवम पालन प्रतिवेदन सम्बन्धित विकाशखंड शिक्षा अधिकारियों को भेज दिया,परंतु बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा विभाग से आदेश के बिना उनके कार्यभार ग्रहण को अमान्य बताया जा रहा है। वे माननीय न्यायालय के आदेश को मानने से इंकार कर रहे हैं.

कार्यभार ग्रहण नहीं होने से 04 माह से वेतन की समस्या

कार्यभार ग्रहण नहीं होने के कारण बिलासपुर एवं रायपुर संभाग के शिक्षकों का विगत चार माह से वेतन लंबित है, जिसका भुगतान भी नहीं हुआ, वहीं अन्य संभागों में वेतन भुगतान हो चुका है। वेतन भुगतान नहीं होने के कारण सभी शिक्षक आर्थिक परेशानियों का लगातार सामना कर रहे हैं एवं बार-बार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे हैं कि उन्हें अपनी संशोधित शाला में कार्यभार ग्रहण कराया जाए,

पढ़ाई व्यवस्था ठप
विगत 4 माह से मामला न्यायालय में होने के से शालाओं की अध्यापन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, इसी बीच तिमाही परीक्षा एवं छह माही परीक्षा भी संपन्न हो चुकी है। शालाओं में विषय की शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित है इस पर शासन का ध्यान क्यों नहीं जा रहा, अधिकांश स्कूलों में केवल 1- 2 ही शिक्षक हैं, जिससे सत्र भर पढाई हुआ ही नहीं। आने वाले समय में वार्षिक परीक्षाएं भी आयोजित होने वाली है इतने कम समय में बच्चों का सिलेबस कैसे कंप्लीट किया जाए यह शासन को सोचना होगा.

क्या नई सरकार शिक्षकों के हित में लेगी निर्णय

पिछली सरकार द्वारा संशोधन निरस्त किया गया था जिससे शिक्षक काफी नाराज हुए और विधानसभा चुनाव में उन्हें करारी हार मिली जिसमें कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान था। चूंकि नई सरकार का गठन हो चुका है और देखने वाली बात यह कि क्या सरकार शिक्षकों के हित में फैसला लेते हुए उन्हें संशोधित शाला में ज्वाइन करवाती है या नहीं जब सर पर आगामी लोकसभा चुनाव है।

शिक्षकों का नई सरकार से उम्मीदें

नई सरकार से शिक्षक काफी खुश है और उनकी यह मांग है कि उन्हें संशोधित शाला में कार्य भार ग्रहण कराया जाए और उन्हें आशा है की नई सरकार उनके और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी, इसके लिए वे लगातार सभी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे है.

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