प्रधानमंत्री मोदी को तियानजिन में भारतीय डायस्पोरा ने गर्मजोशी से स्वागत किया, SCO शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
सात साल बाद चीन की पहली यात्रा पर PM मोदी का भव्य स्वागत, भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रदर्शन ने जीता दिल
तियानजिन/नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चीन पहुंचे, जहां उनका तियानजिन के बिन्हाई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय प्रवासी समुदाय ने गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी यहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।
हवाई अड्डे पर वरिष्ठ चीनी और भारतीय अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। इस दौरान प्रवासी भारतीयों ने उत्साहपूर्वक “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे लगाए। यह प्रधानमंत्री मोदी का सात साल बाद चीन का पहला दौरा है।
भारतीय संस्कृति की झलक से मोहित हुए मोदी
होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति देखी। चीनी कलाकारों ने सितार, संतूर और तबला जैसे भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों पर संगीत प्रस्तुत किया, जिसे पीएम मोदी ने सराहा।

इन कलाकारों ने वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की शिक्षा ली है। चीनी नृत्य समूह की सदस्य झांग जिंगहू ने कहा,
“मैंने बचपन से ओडिसी नृत्य सीखा और बाद में एक भारतीय गुरु से भी इसे सीखा। शास्त्रीय नृत्य एक सागर की तरह है, इसमें गहराई से उतरना पड़ता है। मैंने इसे चीनी छात्रों को सिखाया और उन्हें यह बेहद पसंद आया। पीएम मोदी के सामने प्रस्तुति देना मेरे लिए सम्मान है।”
SCO सम्मेलन में अहम मुलाकातें

प्रधानमंत्री मोदी रविवार, 31 अगस्त को SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात तय है।
SCO के सदस्य देश – भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान।
यह सम्मेलन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने 50% टैरिफ लागू किया है, जिसमें रूसी तेल खरीदने पर भारत को 25% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
भारत-चीन रिश्तों में सुधार की कोशिशें
दोनों देशों ने हाल ही में अपने रिश्तों को सहज बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं: सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति। व्यापार के लिए लिपुलेख पास (उत्तराखंड), शिपकी ला पास (हिमाचल प्रदेश) और नाथु ला पास (सिक्किम) को खोला जाएगा। पर्यटकों, व्यापारियों, मीडिया और अन्य आगंतुकों के लिए वीज़ा सुविधा आसान करने का निर्णय। कूटनीतिक हलकों का मानना है कि इस दौरे से भारत-चीन संबंधों में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।




