
नई दिल्ली: बिहार में मतदाताओं की सूची से 65 लाख नामों को हटाने के मामले में चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दायर किया है। आयोग ने कोर्ट को बताया है कि हटाए गए सभी वोटरों के नाम अब राज्य के 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर डाल दिए गए हैं।
चुनाव आयोग का यह कदम सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का पालन है, जिसमें कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह डेटा सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। यह मामला आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से पहले बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
क्या कहा ECI ने अपने हलफनामे में?

चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत को बताया कि:
नामों की सूची: मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए सभी 65 लाख मतदाताओं के नाम और उनके विवरण राज्य के सभी 38 जिलों की वेबसाइटों पर उपलब्ध करा दिए गए हैं।
हटाने का कारण: सूची में यह भी बताया गया है कि नाम क्यों हटाए गए हैं। इसके कारणों में मृत्यु, निवास स्थान का स्थानांतरण या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल हैं।
भौतिक प्रतियां: ऑनलाइन उपलब्धता के साथ ही, इन सूचियों की भौतिक प्रतियां (hard copies) भी गांवों में पंचायत भवनों, प्रखंड विकास कार्यालयों (BDO) और पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित की गई हैं ताकि लोगों तक आसानी से पहुँच हो सके।
व्यापक प्रचार: आयोग ने बताया कि सूची की जानकारी प्रमुख अखबारों, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया पर भी विज्ञापनों के जरिए दी गई है।
दावे और आपत्ति कैसे दर्ज करें?
चुनाव आयोग ने कोर्ट को सूचित किया कि हटाए गए मतदाताओं के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। सार्वजनिक नोटिस में बताया गया है कि जिन लोगों का नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं है, वे अपने दावों के साथ आधार कार्ड की प्रतियां भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
गौरतलब है कि जिन 65 लाख नामों को हटाया गया है, वे सभी मतदाता जनवरी 2025 में तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल थे। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई जारी है।




