अंबिकापुरछत्तीसगढ़

एक्शन मोड में कलेक्टर, शिक्षकों में भय का वातावरण, पांच-दस मिनट की देरी में मिल रहा कारण बताओ नोटिस, कट रहा है वेतन

कक्षा में बिना किताब, टेबल, कुर्सी के पढाई करना होगा

रोमी सिद्दीकी/अम्बिकापुर। जिले के नवनियुक्त कलेक्टर के भौकाल का असर शिक्षा विभाग पर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है समय पर शिक्षक स्कूल पहुंचे इसके लिए उन्हें इन दिनों काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। आलम यह है अगर कोई शिक्षक पाच मिनट भी विलम्ब हो रहे हैं तो उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया जा रहा है जो कही ना कही शिक्षकों का मनोबल गिराने के समान है। वही अंदेशा लगाया जा रहा कि प्रशासनिक कहर के माहौल में शिक्षा व्यवस्था सुधरने के बजाए कही ठप ना हो जाए।

शासकीय स्कूलों की शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार के द्वारा समय-समय शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं रचनात्मक कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप शासकीय स्कूलों का स्तर दिनों दिन बेहतर हो रहा है। जिसे नकारा नहीं जा सकता है, यही कारण है कि निजी स्कूलों को आज शासकीय स्कूल हर स्तर पछाडते हुए आगे निकल रहे हैं। जहीर है इसके लिए शासकीय स्कूलों के शिक्षक ही प्रशंसा के पात्र हैं।

जिला मुख्यालय से लगे ऐसे कई स्कूल हैं जो इसके साक्षात उदाहरण है लेकिन इस बीच सरगुजा के नवनियुक्त कलेक्टर के द्वारा सीधे तौर पर शासकीय स्कूलों के शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए जिस प्रकार से कसावट लाई गई है। उसे लेकर शिक्षकों के अंदर रोष व्याप्त हो रहा है। जिसके अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ शासकीय स्कूलों में साफ सफाई के लिए भृत्य नहीं है, वही जहा भृत्य है वे संस्था प्रमुख की बातें को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं ऐसे में भुगतना संस्था प्रमुख को है अब या तो स्कूल का प्रधान पाठक हाथ में झाड़ू उठा ले या तो सफाई के लिए कारण बताओ नोटिस पकड़े दोनों ही स्थितियों में प्रधान पाठकों का ही मरन है। वही दूसरी तरफ समय पर स्कूल शिक्षक पहुंचे, चाहे उनका दुर्घटना ही क्यों ना हो जाये, स्कूल पहुंचना है।

सरगुजा कलेक्टर के भौकाल के कारण समय से स्कूल पहुचने के चक्कर में कोई शिक्षक दुर्घटना के शिकार भी हो रहे हैं। बहरहाल, शिक्षक स्कूल में समय से पहुंचे वहा बच्चों को बेहर तालीम दे ये सब जरूरी है लेकिन अगर कोई शिक्षक पाच, दस मिनट अगर किसी कारण वश विलंब हो भी जाए तो ऐसी स्थिति में कारण बताओ नोटिस थमा ना कहां तक जायज है, प्रशासन को इस पर भी गौर करने की आवश्यकता है।

गावों के सड़को से वाकिफ है जाच दल

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का व्यवस्था बेहतर से बेहतर हो ऐसा सभी का प्रयास रहा है। जाहिर है शासकीय स्कूल के शिक्षकों के द्वारा शासन के इस नियम का पालन भी किया जाता रहा है लेकिन मौजूद समय बरसात का है। ऐसे में समय से हर स्कूल के शिक्षक पहुंच भी रहे हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के खस्ताहाल सडकों के कारण भी कुछ शिक्षक निश्चित समय से पांच दस मिनट विलम्ब हो तो भी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है जो कही ना कही न्यासंगत नहीं है।

टेबल, कुर्सी व किताब का उपयोग नहीं करे शिक्षक

सूत्रों की माने तो जिले के तमाम शिक्षण संस्थानों में कोई भी शिक्षक बच्चों को बिना टेबल, कुर्सी व किताब का उपयोग किये बिना पढाई कराने के सख्त निर्देश है। हालाँकि ऐसा आदेश लिखित में है की नहीं यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन जिले के स्कूलों के कक्षाओं से ये तमाम चिजे हटा दिये गये हैं।

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