राज्यसभा में राजभवन का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ करने पर तीखी नोकझोंक, विपक्ष–सत्ता पक्ष आमने-सामने
द्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर TMC ने उठाए सवाल—जेपी नड्डा ने Zero Hour में मुद्दा उठाने पर जताई आपत्ति; कई राज्यों में नाम परिवर्तन लागू, राजनीतिक विवाद गहराया।

राज्यसभा में राजभवन और राजनिवास का नाम बदलकर लोकभवन व लोकनिवास करने के केंद्र के फैसले को लेकर तीखी बहस हुई। TMC और विपक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि केंद्र ने इसे औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का कदम बताया।
नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन राज्यसभा में बुधवार को जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब केंद्र सरकार द्वारा ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ और ‘राजनिवास’ का नाम बदलकर ‘लोकनिवास’ करने के निर्देश पर सदन में तीखी नोकझोंक हुई। यह मुद्दा उठते ही सदन का माहौल गर्म हो गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
Zero Hour में TMC ने मुद्दा उठाया, सत्ता पक्ष की कड़ी आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद डोला सेन ने शून्यकाल के दौरान 25 नवंबर को जारी गृह मंत्रालय के आदेश को उठाया। सत्ता पक्ष ने तुरंत आपत्ति जताई। सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि यह Zero Hour का उपयुक्त विषय नहीं था और विवादित टिप्पणियों को सदन के रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
नाम परिवर्तन की पृष्ठभूमि: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का अभियान
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर के राजभवन और राजनिवास का नाम क्रमशः लोकभवन और लोकनिवास रखने का निर्देश दिया है। यह निर्णय औपनिवेशिक नामों और प्रतीकों को हटाने के बड़े अभियान का हिस्सा है।
इससे पहले भी कई नाम बदले जा चुके हैं:
राजपथ → कर्तव्य पथ
रेस कोर्स रोड → लोक कल्याण मार्ग
कई राज्यों में लागू, अधिसूचनाएं जारी
इस निर्देश का कार्यान्वयन कई राज्यों में शुरू हो चुका है। राज्यपालों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से स्वीकृति लेने के बाद अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं।
अब तक प्रभावित राज्य:
उत्तराखंड: देहरादून व नैनीताल के राजभवन अब लोकभवन
पश्चिम बंगाल: नाम बदलने के साथ बोर्ड और वाहनों पर भी नई पहचान
केरल: आधिकारिक दस्तावेजों में लोकभवन लागू
तमिलनाडु, त्रिपुरा, राजस्थान: प्रक्रिया जारी या लागू
विपक्ष का विरोध और राजनीतिक विवाद
नाम परिवर्तन को लेकर कई राज्यों और विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
पश्चिम बंगाल – TMC के आरोप
राज्य सरकार से कोई परामर्श नहीं लिया गया। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि “राज्यपाल समानांतर प्रशासन चलाने की कोशिश कर रहे हैं”
तमिलनाडु – सीएम एमके स्टालिन का बयान
इसे सिर्फ प्रतीकात्मक कदम बताया
आरोप: केंद्र वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका रहा है
केंद्र का पक्ष: लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने का प्रयास
केंद्र का कहना है कि यह कदम औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने, लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक संरचनाओं को भारतीय भावना के अनुरूप बनाने का प्रयास है।




