बतरे नदी में डूबने से 5 साल के मासूम की मौत, 4 घंटे बाद झाड़ी में मिला शव
औरंगाबाद में घेउरा गांव में नदी किनारे खेलते समय फिसला बच्चा, परिजनों में मातम, मुआवजे की मांग

औरंगाबाद: कुटुंबा प्रखंड में रिसियप थाना क्षेत्र के घेउरा गांव के पास बतरे नदी में सोमवार को एक दिल दहलाने वाली घटना में 5 वर्षीय बालवीर कुमार की डूबने से मौत हो गई. मृतक बालवीर, गांव के रंजीत शर्मा का इकलौता बेटा था. घटना उस समय हुई जब बालवीर अपनी 7 साल की बहन कल्याणी के साथ नदी किनारे खेल रहा था. खेलते समय उसके हाथ में मिट्टी लग गई, जिसे धोने के लिए वह नदी में गया. इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह तेज बहाव वाले गहरे पानी में चला गया.बालवीर को डूबते देख कल्याणी ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहने पर वह दौड़कर घर पहुंची और परिजनों को सूचना दी.
खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे और बच्चे की तलाश शुरू की. काफी देर तक कोई सुराग न मिलने पर स्थानीय पुलिस और सर्किल ऑफिसर (सीओ) चन्द्रप्रकाश को सूचित किया गया. थानाध्यक्ष निशा कुमारी और सीओ दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया. ग्रामीणों और गोताखोरों ने मिलकर नदी में तलाश शुरू की, और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बालवीर का शव नदी किनारे 500 मीटर दूर झाड़ी में फंसा हुआ बरामद किया गया.
थानाध्यक्ष निशा कुमारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए औरंगाबाद भेजा गया और प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया. पुलिस ने इसे दुर्घटना करार दिया है और मामले की जांच कर रही है. नदी के तेज बहाव और किनारे की झाड़ियों के कारण शव 500 मीटर तक बह गया था, जिसे खोजने में काफी समय लगा.
परिजनों का इकलौता चिराग बुझा:
बालवीर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, और उसकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डुबो दिया. परिजन रो-रोकर बेहाल हैं, और गांव में मातम का माहौल है. जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि सुबोध कुमार सिंह ने परिवार से मिलकर सांत्वना दी और आपदा प्रबंधन विभाग से मुआवजे की मांग की है. बिहार सरकार की नीति के तहत ऐसी घटनाओं में पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है, और स्थानीय प्रशासन से इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू करने की अपील की गई है.इस घटना ने एक बार फिर नदियों में सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर किया है. ग्रामीणों ने मांग की है कि नदी किनारे खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और रेलिंग लगाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोका जा सके.




