योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई: UP में संदिग्ध रोहिंग्या–बांग्लादेशी घुसपैठियों पर शिकंजा, सभी मंडलों में निरुद्ध केंद्र बनाए जाएंगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 शहरी निकायों को संदिग्ध विदेशी नागरिकों की विस्तृत सूची बनाने का निर्देश दिया; हर मंडल में विशेष निरुद्ध केंद्र और जिलों में अस्थायी हिरासत केंद्र की तैयारी तेज।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने संदिग्ध रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और कार्रवाई के लिए राज्यव्यापी अभियान को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 17 शहरी शासकीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की विस्तृत सूची तैयार करने के आदेश जारी हुए हैं। यह सूची संबंधित पुलिस महानिरीक्षक (IG) एवं मंडल आयुक्तों को सौंपी जाएगी।
हर मंडल में बनेंगे विशेष निरुद्ध केंद्र
राज्य सरकार ने हर मंडल में विशेष निरुद्ध केंद्र (Detention Centres) स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां सत्यापन के दौरान संदिग्ध विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा।
22 नवंबर को समस्त जिलाधिकारियों को आदेश दिए गए कि वे तुरंत कार्रवाई शुरू करें और अपने जिले में अस्थायी हिरासत केंद्र (Temporary Holding Centres) तैयार करें।
कई जिलों में दस्तावेज जांच, सत्यापन और क्षेत्रीय सर्वे का काम तेजी से जारी है।
राष्ट्रीय स्तर पर अवैध प्रवेश का परिप्रेक्ष्य
इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट 2025:
अवैध प्रवेश पर 5 साल की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान; डिपोर्टेशन प्रक्रिया को और मजबूत किया गया।
BSF रिपोर्ट:
2024–25 में सीमा पर 10,263 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए।
केंद्र की समिति:
घुसपैठ से जनसांख्यिकीय बदलाव के अध्ययन के लिए विशेष समिति कार्यरत; असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश मुख्य फोकस।
मुंबई:
2025 में 1,001 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया।
जमीनी कार्रवाई: UP में तेज सर्च ऑपरेशन
बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर सहित कई जिलों में भाषा विशेषज्ञों और पुलिस टीमों की सहायता से सर्च अभियान चल रहे हैं। लखनऊ के डालीबाग और एयरपोर्ट इलाके की झुग्गियों में छापेमारी की गई, जहां से संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध प्रवेश के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अवैध घुसपैठियों को कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होते।
योगी सरकार: कानून–व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि: कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द
राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद संदिग्ध विदेशी नागरिकों को उनके मूल देशों में डिपोर्ट किया जाएगा।




