बलूचिस्तान में आत्मघाती हमला: बीएनपी रैली के बाद धमाका, 14 की मौत, 35 घायल
क्वेटा में सरदार अताउल्लाह मेंगल की पुण्यतिथि पर आयोजित रैली के बाद हुआ विस्फोट, बीएनपी नेता अख्तर मेंगल बाल-बाल बचे; मुख्यमंत्री ने हमले की निंदा की, सुरक्षा कड़ी की गई।
कराची : पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर से सुरक्षा तंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मंगलवार रात क्वेटा के सरियाब क्षेत्र में एक भयावह आत्मघाती हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (बीएनपी) की रैली समाप्त होने के तुरंत बाद हुए इस विस्फोट में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और 35 लोग घायल हो गए।
हमला उस समय हुआ जब लोग शहीद सरदार अताउल्लाह मेंगल की चौथी पुण्यतिथि पर आयोजित बीएनपी की विशाल सार्वजनिक रैली से निकल रहे थे। अचानक गूंजे धमाके ने पूरे इलाके में अफरातफरी मचा दी।
कैसे हुआ हमला?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह विस्फोट शाहवानी स्टेडियम के पास पार्किंग क्षेत्र में हुआ। रैली समाप्त होने के करीब 15 मिनट बाद, जब भीड़ धीरे-धीरे निकल रही थी, तभी हमलावर ने विस्फोटकों से भरी जैकेट पहनकर खुद को उड़ा लिया।
पुलिस प्रमुख ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि “यह एक सुनियोजित आत्मघाती विस्फोट था।” धमाके की शक्ति इतनी अधिक थी कि आसपास खड़ी दर्जनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और लोगों के शव चारों ओर बिखर गए। घटनास्थल पर तुरंत आपातकालीन सेवाएं पहुँचीं और घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
प्रमुख नेता सुरक्षित
बीएनपी प्रमुख अख्तर मेंगल, जो इस रैली की अध्यक्षता कर रहे थे, विस्फोट होने से कुछ देर पहले ही कार्यक्रम स्थल से निकल चुके थे और सुरक्षित घर पहुँच गए। इस बीच यह भी राहत की खबर रही कि रैली में शामिल रहे अन्य वरिष्ठ नेता— पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी के प्रमुख महमूद खान अचकजई और अवामी नेशनल पार्टी के वरिष्ठ नेता असगर खान अचकजई— भी बाल-बाल बच गए।
हालांकि, बीएनपी के कई अग्रणी कार्यकर्ता और समर्थक इस हमले में घायल हुए, जिनमें प्रांतीय असेंबली के पूर्व सदस्य मीर अहमद नवाज बलूच और पार्टी के केंद्रीय श्रम सचिव मूसा जान शामिल हैं। यह घटना सीधे तौर पर पार्टी के कार्यक्रम और उसके समर्थकों को निशाना बनाने की कोशिश लग रही है।

पीड़ितों के परिवार और पार्टी की प्रतिक्रिया
बीएनपी प्रमुख अख्तर मेंगल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख कर हमले में अपने समर्थकों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे “कायराना आतंकी कृत्य” बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके 15 से अधिक कार्यकर्ता मारे गए हैं।
जनाजे निकालने की तैयारी शुरू होते ही क्वेटा शहर में भारी सन्नाटा छा गया। हर गली और अस्पताल में रोते-बिलखते परिवारजन मौजूद थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, घायलों में से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि इस तरह के हमले प्रांत को अस्थिर करने की गहरी साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने इसे “मानवता का दुश्मनी भरा अपराध” करार दिया।
सरकार ने हमलावरों का पता लगाने के लिए विशेष जांच समिति का गठन किया है। वर्तमान में किसी आतंकी संगठन ने इस धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली है, जिससे जांच और भी पेचीदा हो गई है।
इसके अलावा, पूरे क्वेटा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की गश्त बढ़ा दी गई है।
बलूचिस्तान और आतंकवाद की चुनौती
बलूचिस्तान लंबे समय से अशांति, अलगाववादी आंदोलनों और आतंकवादी गतिविधियों का गढ़ रहा है। पाकिस्तान में यह इलाका रणनीतिक रूप से अहम है, लेकिन यहां आतंकवादी तत्व अक्सर सुरक्षा बलों, राजनीतिक रैलियों और नागरिक इलाकों को अपना निशाना बनाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बलूचिस्तान की अस्थिरता केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित नहीं करती बल्कि यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य से भी जुड़ी है। खासकर ऐसे समय में जब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के कारण यह प्रांत वैश्विक निगाहों में है।




