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2 साल में समाप्त हुई 5 दशकों की समस्या, नक्सलवाद के खात्मे पर विजय शर्मा की प्रेसवार्ता, कहा-‘आज ऐतिहासिक दिन है’

रायपुर। Vijay Sharma PC on Naxalism: नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन का आज अंतिम दिन रहा। इस मौके पर गृहमंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कहा कि, 50 वर्षों का संघर्ष दो वर्ष में खत्म हुआ। बस्तर की जनता ने अब नक्सलवाद को नकार दिया है। छत्तीसगढ़ में आज एक ऐतिहासिक दिन के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि सशस्त्र नक्सल कैडर का अंत हो चुका है और इसी के साथ ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। आज हम उस दिन पर है जब नक्सल समाप्त हुआ है जो की छत्तीसगढ़ के लिए इससे अच्छा अवसर कुछ नहीं हो सकता। करीब पांच दशकों से चली आ रही नक्सल समस्या को पिछले दो वर्षों में निर्णायक रूप से समाप्त करने की दिशा में सफलता मिली है। इसे मजबूत संकल्प, रणनीतिक योजना और सुरक्षा बलों की सामर्थ्य का परिणाम बताया जा रहा है।

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रणनीति और प्रशासनिक बदलाव

विजय शर्मा ने बताया कि, दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए बिना ही नई रणनीति अपनाई गई। बस्तर क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन किया गया। पहली बैठक में यह सामने आया कि लगभग 70% नक्सल कैडर राज्य के भीतर से ही संबंधित था, जिससे छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख केंद्र (हब) के रूप में देखा जाता था। इसके बाद CRPF और राज्य पुलिस को संयुक्त अभियान और सटीक गणना (इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन) के निर्देश दिए गए। दूसरी डीजी-आईजी बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

जनता की भूमिका रही निर्णायक

सरकार का मानना है कि, इस अभियान में सबसे बड़ा योगदान बस्तर की जनता का रहा। लोगों ने नक्सलवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा विकास की मांग की। नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जैसे जिलों में विशेष अभियान चलाए गए। उन्होंने कहा कि, हमने नक्सल समूहों से संवाद स्थापित करने के लिए कई बार प्रयास किया ईमेल, फोन कॉल और वीडियो कॉल के माध्यम से कई प्रयास किए गए। जो नक्सली मुख्यधारा में लौटना चाहते थे, उनके लिए पुनर्वास योजनाएं चलाई गईं। इसमें समाज प्रमुखों और स्थानीय समुदायों की भी अहम भूमिका रही।

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सुरक्षा बलों और तकनीक का योगदान

इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों को दिया गया है। तकनीक आधारित इनपुट और सटीक ऑपरेशन ने अभियान को मजबूती दी। हालांकि, कुछ राजनीतिक आरोप भी सामने आए, वही पूर्व मुख्यमंत्री ने एक आरोप लगाया था की जो एनकाउंटर हुआ उसे फर्जी बता दिया गया। ठीक दूसरे दिन ही उनके संगठन से पत्र आ गया की इतने लोग ही मारे गए।

बदलता बस्तर

आज बस्तर के लोगों में नई उम्मीद दिखाई दे रही है। स्थानीय लोग इसे “वास्तविक आज़ादी” का समय बता रहे हैं। विजय शर्मा ने बताया कि,  मैं सभी समाज प्रमुखो से बैठता था। उनसे बातचीत करता था। सारे समाज के लोग तैयार थे और वही लोग पुनर्वस के लिए प्रेरित किए। नारायणपुर,सुकमा,बीजापुर में सक्रियता थी, उनके लिए प्रयास किया, जो नक्सली वापस आना चाहते थे, पत्रकार की भूमिका रही उनके साथ आए। सरकार का दावा है कि छतीसगढ़ के सीमा क्षेत्र में अब कोई सक्रिय “DKSG कैडर” शेष नहीं है।

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Vijay Sharma PC on Naxalism: सरकार का कहना है कि अब फोकस विकास, पुनर्वास और स्थायी शांति पर रहेगा। ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम के जरिए सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने की योजना है। बस्तर में लोग अब कहने लगे है अभी हमें आज़ादी मिली है हम अब आज़ाद हुए है।  दिल्ली में लोग बैठकर बोला करते थे सरकार इन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा,  लेकिन यहाँ IED तो किसी को नहीं पहचानता। यही सारे लोग दिल्ली गए थे राष्ट्रपति और गृह मंत्री से मुलाक़ात कर आए थे और अपने मानव अधिकार के बारे में चर्चा किए थे।

 

 

 

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