सरहुल महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, कार्यक्रम में शामिल होकर सीएम ने की विधि विधान से पूजा-अर्चना, जनजातीय संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश
जशपुरनगर। Sarhul Festival : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। पूजा कराने वाले बैगा ने मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल फूल) को खोंचकर सरहुल पर्व की शुभ रस्म निभाई। इस अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं मांदर की थाप पर पूरा परिसर उत्साह और उल्लास से झूम उठा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव तथा हिंदू नव वर्ष की बधाई देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव सदियों से प्रकृति और धरती पूजा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

भारी संख्या में आमनागरिक मौजूद
इस उत्सव में बैगा, पाहन एवं पूजारी द्वारा धरती माता की पूजा कर वर्षा, खेती और बरकत की कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि यह जनजातीय समाज की विशिष्ट सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्ण कुमार राय, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष राजू गुप्ता, मुकेश शर्मा, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं भारी संख्या में आमनागरिक मौजूद रहे।

जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए बजट में विशेष प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक प्रस्तुत किया गया है, जो धर्मांतरण रोकने में कारगर सिद्ध होगा। सरकार प्रदेश की 3 करोड़ जनता से किए गए वादों को लगातार पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आवास सुविधाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। महतारी वंदन योजना के तहत 24 किश्तों में 15000 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं तथा 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी भी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाएं सशक्त हो रही हैं और प्राप्त राशि का उपयोग आजीविका संवर्धन, सुकन्या समृद्धि जैसे कार्यों में कर रही हैं। जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है, जिसके तहत गांव के बैगा को प्रतिवर्ष 5000 रुपए दिए जाएंगे तथा जनजाति क्षेत्रों में गांव में स्थित अखरा विकास के लिए 15 से 25 लाख रुपए तक की व्यवस्था की जाएगी।

पूजा और प्रसाद वितरण के साथ सामाजिक एकता का संदेश
Sarhul Festival : उल्लेखनीय है कि सरहुल परब, चैत्र महीने में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है। यह प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक है, जब पेड़ों में नए पत्ते और फूल आते हैं तथा महुआ और साल-सखुआ के फूलों से वातावरण महक उठता है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पारंपरिक विधि से पूजा और प्रसाद वितरण के साथ सामाजिक एकता का संदेश दिया जाता है। महोत्सव के दौरान युवक-युवतियों द्वारा पारंपरिक नृत्य-गीत प्रस्तुत किए जाते हैं तथा वर्षा और फसल का अनुमान लगाने की परंपरा निभाई जाती है। घर-घर सरई (साल) फूल और पवित्र जल का वितरण कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। सरहुल महोत्सव जनजातीय आस्था, प्रकृति प्रेम और सामूहिक जीवन की समृद्ध परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जो समाज को एकता और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है।





