Gen-Z आंदोलन के बाद भारत-नेपाल सीमा खुली, व्यापार और आम लोगों को मिली राहत
दो हफ्तों से बंद था आवागमन, नेपाल सरकार ने वाहनों को भंसार सुविधा देने के साथ शुरू की आवाजाही
अररिया/जोगबनी : नेपाल में हुए Gen-Z आंदोलन के बाद बंद की गई भारत-नेपाल सीमा को मंगलवार से वाहनों के लिए खोल दिया गया। करीब दो हफ्तों तक बंद रही इस सीमा के खुलने से आम लोगों, व्यापारियों और टैक्सी चालकों ने राहत की सांस ली।
क्यों बंद हुई थी सीमा?
सितंबर की शुरुआत में नेपाल में उग्र हुए आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा के मद्देनज़र सीमा सील कर दी गई थी। भारत की ओर से 15 सितंबर को सीमा खोल दी गई थी, लेकिन नेपाल ने वाहनों की आवाजाही रोक रखी थी क्योंकि आंदोलन में हुए नुकसान के बाद वह भंसार सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं था।
अब क्या बदला?
मंगलवार को नेपाल सरकार ने वाहनों को भंसार की सुविधा देने की व्यवस्था शुरू कर दी। बुधवार से भारतीय वाहनों को भी नेपाल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। सीमा खुलते ही जोगबनी बाजार में नेपाली नागरिक बड़ी संख्या में रोजमर्रा का सामान खरीदते नजर आए। सीमा खुलने से खासतौर पर टैक्सी चालकों और व्यापारियों को सबसे ज्यादा राहत मिली है। टैक्सी चालकों ने कहा कि जोगबनी स्टेशन से यात्रियों को लाने-ले जाने से ही उनकी आजीविका चलती है, जबकि व्यापारी मानते हैं कि अब दुर्गा पूजा के दौरान मंदी खत्म होगी। विराटनगर-रानी, सोनौली, रुपईडीहा समेत अन्य प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर भी धीरे-धीरे आवाजाही बहाल हो रही है। औद्योगिक और व्यापारिक मार्गों पर रुके ट्रक अब चलने लगे हैं। हालांकि, दोनों देशों की एजेंसियां सुरक्षा के मद्देनज़र सतर्क बनी हुई हैं।




