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वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए ही हैं शिक्षा संस्थान – पूर्व कुलपति एवं खगोल वैज्ञानिक प्रो एस के पांडेय

रायपुर। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आर्ट्स ब्लॉक के सेमिनार हाल में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा और पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एस्ट्रो फिजिक्स के प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ एस के पांडेय ने बताया कि आजादी मिलते ही, देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने देश में शिक्षा और विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए विश्वस्तरीय संस्थानों का निर्माण कराया।

उन्होंने कहा था कि वही देश विकास कर सकता है जो विज्ञान को साथ लेकर चलेगा। उन्होंने इस दिशा में सिर्फ कहा ही नहीं बल्कि देश में पांच आईआईटी तो स्थापित करवाई ही, नेशनल फिजिक्स लैब, नेशनल केमिस्ट्री लैब, रीजनल रिसर्च लेबोरेटरी, इसरो जैसे उच्च स्तरीय वैज्ञानिक संस्थान और साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट जैसे विभागों का गठन भी किया। हर साल वे नेशनल साइंस कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में भाग लेते थे और वैज्ञानिकों को बेहतर खोजों के लिए प्रोत्साहित करते थे। नेहरू के समय वैज्ञानिक संस्थाओं में नौकरशाही हावी नहीं थी और वैज्ञानिकों को खुलकर काम करने के अवसर मिलते थे। उन्होंने विज्ञान के विकास में प्रसिद्द वैज्ञानिकों आर्यभट्ट, चरक, न्यूटन, कापरनिकस, गेलेलियों, आइंस्टीन और जगदीश चंद्र बसु, सत्येंद्र नाथ बोस, मेघनाथ साहा, सी वी रमन आदि वैज्ञानिकों का स्मरण किया और उनके कामों की याद दिलाई।

उन्होंने बताया कि हम इस साल को “इंटरनेशनल ईयर फॉर बेसिक साइंसेज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट” के रूप में मना रहे हैं। विज्ञान दिवस के अवसर पर उन्होंने कलकत्ता के “सेंटर फॉर कल्टीवेशन आफ साइंस” जैसी संस्थाओं की याद दिलाई जहां सी वी रमन ने अपना शोध संबंधी प्रारंभिक काम किया था। प्रो पांडेय ने कहा कि विज्ञान के साथ वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए हमारे देश के संविधान में विशेष धारा जोड़ी गई है जिसके अनुसार वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार प्रसार करना हर नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य है। हम सबको वैज्ञानिक सोच को बढ़ाने, इसके प्रचार प्रसार के लिए आगे आकर कार्य करना होगा।

विज्ञान दिवस के कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के एल वर्मा ने कहा कि हमारे देश में अवसरों की कमी नहीं है। हम सब को यह जिम्मेदारी लेनी है कि कैसे हम वैज्ञानिक सोच को जन जन तक पहुंचाए। हम अपने लोगों को समझाएं कि विज्ञान कैसे काम करता है, यह हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने अंधविश्वास छोड़ने और हर घटना को, हर बात को विज्ञान की कसौटी पर कसने और तब उसे मानने की अपील की। विज्ञान दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष प्रो एम एल नायक ने कहा कि हमारे देश में वैज्ञानिक प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उन्हें सही पहचान नहीं मिल पाती है। आज विज्ञान तेजी से बदल रहा है। इसके साथ हमारा पर्यावरण भी तेजी से बदल रहा है जिसके कारण पृथ्वी पर से अनेक जीव जंतु विलुप्त होते जा रहे हैं। इसके लिए मुख्य रूप से मनुष्य ही जिम्मेदार है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है अंधविश्वासों को दूर करना। अपने देश के विकास के दौरान हमने सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर किया है वैसे ही अब वर्तमान में जारी अंधविश्वास को भी हम दूर कर सकते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियो को अपने गांव में और आसपास टोनही के अंधविश्वास के खिलाफ कड़ाई से आगे आकर इसके उन्मूलन का आह्वान किया और कहा कि आज ज्ञान विज्ञान की इतनी उन्नत अवस्था में भी टोनही जैसे अंधविश्वास का होना शर्म की बात है।

इस अवसर पर विज्ञान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व अपर कलेक्टर विश्वास मेश्राम ने कहा कि हमें वैज्ञानिक सोच न सिर्फ अपनाना है बल्कि इसके प्रचार प्रसार का काम भी करना है । हमें अपने लोगों को ठगी से बचाना है तो उन्हे अंध विश्वासों के प्रति जागरूक करना होगा। उन्होंने आम जन के भीतर सवाल उठाने की प्रवृति बढ़ाने की बात की और कहा कि किसी की किसी बात को मानने के पहले उसका परीक्षण करें, उसे जानें और तब माने। उन्होंने कहा कि आज परबुधिया बनने से काम नहीं चलने वाला बल्कि चतुर चालाक और धूर्त ठग हमें झांसे देकर लुटते रहेगें। इसलिए झंसेबाजों, धूर्त ठगों तथा मीठी मीठी बातें करने वालों से सावधान रहें और हर व्यक्ति की बातों का, हर अफवाह का, हर घटना का स्व विवेक से विश्लेषण करें और तब उसे माने। कार्यक्रम का सफल संचालन एंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट के अध्यक्ष, प्रोफेसर अशोक प्रधान ने किया।

उन्होंने विज्ञान दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जरूरत पर विस्तार से बताया और विज्ञान के प्रचार प्रसार में यूनिवर्सिटी के द्वारा किए जा रहे कामों की जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुवात में सेन्टर फार बेसिक साइंसेज के विद्यार्थियो द्वारा विज्ञान गीत “पेड़ हैं सांसे, पेड़ है जीवन, पेड़ों की रखवाली हो। जंगल जंगल नाच उठे और जगह जगह हरियाली हो” गीत की समधुर प्रस्तुति दी। विज्ञान दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जाने में यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो के एल वर्मा, एंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड प्रो अशोक प्रधान, एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रो फिजिक्स के डा नंद कुमार चक्रधारी, सेंटर फॉर बेसिक साइंस के डॉ लक्ष्मीकांत चावरे, विज्ञान सभा के रतन गोंडाने, वसंत निकोसे, चंद्रकला नेताम, अंजू मेश्राम आदि सदस्यों का सक्रीय योगदान रहा।

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