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बेतिया राज की जमीन पर उद्योग का नया दौर : बिहार को मिलेगा सबसे बड़ा लैंड बैंक, औद्योगिक निवेश की राह होगी आसान

बेतिया राज की करीब ढाई हजार एकड़ जमीन अब बिहार में औद्योगिक निवेश के लिए खुलने जा रही है। उद्योग विभाग और बीआडा के जरिए यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक हब विकसित किया जाएगा। इससे सीमांचल और पश्चिमी चंपारण क्षेत्र में रोजगार, व्यापार और निवेश को नई दिशा मिलेगी।

पटना : बिहार में उद्योग और निवेश को लेकर लंबे समय से बातें होती रही हैं। कई बार दावे हुए, कई बार योजनाओं का खाका बना, लेकिन जमीन की उपलब्धता हमेशा सबसे बड़ी चुनौती रही। अब वही तस्वीर बदलने वाली है। पश्चिमी चंपारण के बेतिया राज की करीब ढाई हजार एकड़ जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह बिहार का सबसे संभावनाशील लैंड बैंक होगा और आने वाले दिनों में यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश देखने को मिलेगा।

उद्योग विभाग ने की तैयारी

उद्योग विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। जमीन हस्तांतरण के बाद इसे बियाडा (BIADA) को सौंपा जाएगा, जो औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का जिम्मा संभालेगा। बियाडा पहले से ही राज्य में कई औद्योगिक क्षेत्रों को तैयार कर चुका है, और अब बेतिया राज की जमीन पर भी आधुनिक इंडस्ट्रियल हब विकसित करने की योजना है।

कंपनियों की नजर

सूत्रों के मुताबिक, राज्य और देश की कई बड़ी कंपनियां इस जमीन पर निवेश को लेकर इच्छुक हैं। कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, वेयरहाउसिंग और लघु उद्योग यहां खास आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं। सीमांचल और तराई क्षेत्र से सटे इस इलाके की भौगोलिक स्थिति भी कंपनियों के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

नया औद्योगिक कॉरीडोर

केवल बेतिया ही नहीं, भागलपुर में भी औद्योगिक गतिविधियों की नई शुरुआत हो रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने गोराडीह मौजाडीह इलाके में करीब 97 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दी है। खास बात यह है कि यह जमीन उसी शर्त पर दी गई है कि अगर इसका उपयोग उद्योग के लिए नहीं हुआ, तो इसे स्वतः वापस कर दिया जाएगा।

जानकार बताते हैं कि बिहार सरकार राज्य में हाईवे किनारे उन जमीनों को तलाश रही है, जो बंजर हैं और जहां खेती नहीं होती। इसका मकसद है कि खेती योग्य जमीन का नुकसान किए बिना उद्योग को बढ़ावा दिया जा सके।

अब तक का भू-अर्जन

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी चंपारण को छोड़कर राज्य के सभी जिलों से अब तक करीब 18,959 एकड़ जमीन के भू-अर्जन प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से 14,600 एकड़ जमीन का अर्जन पूरा हो चुका है, जबकि शेष जमीन के अर्जन की प्रक्रिया जारी है। यह साफ संकेत है कि राज्य सरकार अब बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश की ओर बढ़ रही है।

केंद्र का समर्थन

इसी बीच, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि बिहार को चार नए औद्योगिक कॉरीडोर दिए जाएंगे। यह घोषणा निवेशकों के विश्वास को और मजबूत करने वाली है। राज्य सरकार ने भी इसे ध्यान में रखते हुए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

उम्मीदें और संभावनाएं

बेतिया राज की जमीन पर उद्योग बसना केवल पश्चिमी चंपारण के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि राज्य की औद्योगिक छवि भी बदलेगी। लंबे समय से पिछड़ेपन और पलायन की मार झेल रहे इस क्षेत्र के लिए यह जमीन सचमुच नए दौर की नींव रखने जा रही है।

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