
रायपुर: छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज को लेकर सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया के बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। अपने छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे भूरिया ने राज्य में आदिवासियों के हालात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
“अगर आदिवासियों का विनाश देखना है तो छत्तीसगढ़ आइए” – विक्रांत भूरिया
विक्रांत भूरिया ने कहा, “देश में सबसे ज्यादा आदिवासियों का शोषण छत्तीसगढ़ में हो रहा है। अगर किसी को आदिवासी विनाश देखना है तो छत्तीसगढ़ आ जाना चाहिए। यहां आदिवासियों को मारा जा रहा है, उनके नेताओं को जेल में बंद किया जा रहा है। हमें आदिवासियों की मूर्तियां नहीं, सम्मान और अधिकार चाहिए।”
भूरिया का इशारा प्रदेश में हो रहे एनकाउंटर, वन अधिकार कानून के उल्लंघन और आदिवासी नेताओं की गिरफ्तारी की ओर था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें सिर्फ प्रतीकों की राजनीति कर रही हैं, जमीनी हकीकत भयावह है।
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अरुण साव का पलटवार – “कांग्रेस को आदिवासियों की तरक्की बर्दाश्त नहीं”
विक्रांत भूरिया के आरोपों पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के लिए जितना काम हुआ है, उतना कांग्रेस शासन में कभी नहीं हुआ। कांग्रेस सिर्फ वोटबैंक की राजनीति करती है और अब जब आदिवासी समाज को वास्तविक लाभ मिल रहा है, तो उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।”
साव ने भूरिया के बयानों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आदिवासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार को लेकर ऐतिहासिक योजनाएं चला रही है, जबकि कांग्रेस ने सिर्फ उन्हें उपेक्षा और अत्याचार दिया।
आदिवासी शोषण और राजनीतिक बयानबाज़ी
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी मुख्यमंत्री, आदिवासी अधिकार और नक्सल प्रभावित इलाकों में कार्रवाई जैसे मुद्दे वर्षों से चर्चा में हैं। झीरम घाटी हमला, बस्तर में आदिवासी आंदोलन, और वनाधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर लगातार राजनीतिक दल आमने-सामने रहे हैं।
अब विक्रांत भूरिया और अरुण साव के बयानों से एक बार फिर आदिवासी मुद्दे पर राजनीति गरमाई है। आगामी समय में यह मुद्दा राज्य के चुनावी समीकरणों और जनचर्चा का केंद्र बन सकता है।




