
रायपुर : छत्तीसगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनके अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में मीडिया कवरेज को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी नया प्रोटोकॉल अब सियासी बहस का कारण बन गया है। विभाग ने 13 जून को एक पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के ज्वाइंट डायरेक्टर और अस्पताल अधीक्षकों को मीडिया कवरेज से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
प्रोटोकॉल के मुताबिक, अब मीडिया कर्मी अस्पतालों में कवरेज करने से पहले अस्पताल प्रबंधन द्वारा नामित जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क करेंगे। बिना अनुमति वीडियो या फोटोग्राफी नहीं की जा सकेगी और मरीजों से बातचीत से पहले जिम्मेदार अधिकारी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, संवेदनशील मामलों में रिपोर्टिंग से पहले लिखित स्वीकृति जरूरी कर दी गई है। अस्पताल परिसर में रिपोर्टरों की स्वतंत्र आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।
राजनीतिक घमासान शुरू
इस आदेश के बाद प्रदेश में सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस फैसले को प्रेस की आजादी पर हमला बताया है। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार बनने के बाद से स्वास्थ्य विभाग की हालत बदतर हो चुकी है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अस्पतालों में मीडिया की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह फैसला मीडिया के लिए आपातकाल जैसा है।”
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भी सरकार पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “तुम इतना जो घबरा रहे हो, क्या कमी है जिसे छिपा रहे हो?” उन्होंने लगातार दो पोस्ट कर इस प्रोटोकॉल पर सवाल उठाए और इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताया।
सरकार की मंशा पर सवाल
विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के नियमों से मीडिया की निगरानी और जनहित से जुड़ी खबरों को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि सरकार की तरफ से इस आदेश को अभी औपचारिक रूप से सार्वजनिक रूप से बचाव नहीं किया गया है।
मीडिया प्रोटोकॉल को लेकर जारी ये आदेश अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आगामी दिनों में इसके खिलाफ विपक्ष के विरोध और सरकार के रुख पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।




