पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड: नौ साल बाद शनिवार को आएगा फैसला, विशेष सीबीआई अदालत में होगा न्याय का ऐलान
शहाबुद्दीन की मौत के बाद बाकी आरोपितों पर टिकी निगाहें

मुजफ्फरपुर : सीवान के चर्चित पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में नौ साल बाद आखिरकार फैसले का दिन नजदीक है। गुरुवार को बहुप्रतीक्षित फैसला टलने के बाद अब जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-तीन नमिता सिंह की विशेष सीबीआई अदालत शनिवार, 30 अगस्त 2025 को अपना निर्णय सुनाएगी। इस सनसनीखेज मामले ने न सिर्फ बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे, बल्कि पत्रकारिता की आजादी पर भी गहरी चोट की थी।
13 मई 2016 की वो काली रात
13 मई 2016 की शाम सवा सात बजे, सीवान रेलवे स्टेशन के पास उस वक्त खौफ का मंजर बन गया, जब ‘हिन्दुस्तान’ अखबार के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन को पेशेवर अपराधियों ने घेर लिया। एक फोन कॉल पर स्टेशन रोड पहुंचे राजदेव पर साइलेंसर लगी बंदूक से ताबड़तोड़ पांच गोलियां दागी गईं। गोली उनके सिर, गले और पेट में लगी, और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस वारदात ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था।
पत्नी की गुहार, CBI को सौंपी गई जांच
राजदेव की पत्नी आशा यादव ने सीवान के नगर थाने में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। शुरुआत में बिहार पुलिस ने जांच शुरू की और छह आरोपितों—लड्डन मियां उर्फ अजहरुद्दीन बेग, रोहित कुमार सोनी, विजय कुमार गुप्ता, राजेश कुमार, सोनू कुमार गुप्ता और रिशु कुमार जायसवाल—के खिलाफ 20 अगस्त 2016 को चार्जशीट दाखिल की। एक जुवेनाइल का ट्रायल अलग से चल रहा है। बाद में, 15 सितंबर 2016 को केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन सहित आठ आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
फैसला टलने की वजह: एक आरोपित की ‘बीमारी’
गुरुवार को कोर्ट में फैसला सुनाए जाने की पूरी तैयारी थी। पांच आरोपितों—लड्डन मियां, रोहित कुमार सोनी, राजेश कुमार, सोनू कुमार गुप्ता और रिशु कुमार जायसवाल—को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया। लेकिन जमानत पर चल रहे आरोपित विजय कुमार गुप्ता की ‘बीमारी’ ने फैसले को टाल दिया। उनके वकील ने कोर्ट में बीमारी का हवाला देते हुए अर्जी दी, जिसके चलते विशेष सीबीआई अदालत को फैसला शनिवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
शहाबुद्दीन की मौत, फिर भी सस्पेंस बरकरार
इस केस में मुख्य आरोपितों में शामिल पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की कोविड-19 के कारण मौत हो चुकी है। अब बाकी सात आरोपितों के भाग्य का फैसला शनिवार को होगा। सीबीआई ने 69 गवाहों और 111 प्रदर्शों के आधार पर सेशन ट्रायल चलाया, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। एक वक्त तो सीबीआई ने गवाह बदामी देवी को ‘मृत’ घोषित कर दिया था, मगर वह कोर्ट में जिंदा हाजिर हो गईं, जिसने जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
राजदेव रंजन की हत्या को पत्रकारिता पर सीधा हमला माना गया। उनकी बेबाक पत्रकारिता, खासकर शहाबुद्दीन जैसे ताकतवर नेताओं के खिलाफ खबरें, कईयों को खटकती थीं। उनकी पत्नी आशा यादव ने न सिर्फ सीबीआई जांच की मांग की, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केस को सीवान से दिल्ली स्थानांतरित करने की गुहार भी लगाई थी।
शनिवार को टिकी हैं निगाहें
शनिवार को विशेष सीबीआई अदालत का फैसला न सिर्फ राजदेव रंजन के परिवार, बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत और आम जनता के लिए अहम होगा। क्या नौ साल बाद राजदेव को इंसाफ मिलेगा, या फिर यह मामला और सवाल खड़े करेगा? बस, अब इंतजार है उस पल का, जब कोर्ट का हथौड़ा सच को सामने लाएगा।




