दिल दहलाने वाली वारदात : झंझारपुर में पति ने पत्नी और दो बेटों पर तेजाब फेंका, बेटे की हालत गंभीर
घरेलू विवाद बना खौफनाक हादसा, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

झंझारपुर, मधुबनी :
शहर की घनी बस्तियों के बीच, शनिवार की उस खामोश दोपहर अचानक चीख-पुकार से माहौल बिखर गया। झंझारपुर, मधुबनी के वार्ड नंबर 14 के एक साधारण से घर में, घरेलू कलह ने जिंदगी का सबसे भयावह चेहरा दिखा दिया। लालू मुखिया धीरे-धीरे अपने गुस्से की आग में सुलगते हुए आखिरकार उस कगार पर पहुंच गया, जहां इंसानियत भी शर्मसार हो जाए। गुस्से में अंधे लालू ने अपनी पत्नी रेखा देवी और दो मासूम बेटों सचिन और रणवीर पर तेज़ाब फेंक दिया। पल भर में चीखें गूंज उठीं, घर का सन्नाटा तड़पती सांसों में बदल गया। एसिड के तेज दर्द और डर से तड़पते बच्चे और मां को अस्पताल ले जाया गया।
नगर परिषद वार्ड नंबर 14 में लालू मुखिया द्वारा अपनी पत्नी रेखा देवी और बेटों सचिन कुमार (15) व रणवीर कुमार (12) पर तेज़ाब फेंके जाने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। पीड़ितों में सचिन की हालत सबसे ज्यादा गंभीर है, जिसे मधुबनी सदर अस्पताल रेफर किया गया है। रेखा देवी और रणवीर भी झुलसे हैं और उनका इलाज चल रहा है।
क्या हुआ उस दिन?
स्थानीय सूत्रों और वार्ड पार्षद रोशन कुमार झा के अनुसार, लालू मुखिया की दो पत्नियां हैं। घरेलू विवाद लंबे समय से चल रहा था। शुक्रवार—शुक्रवार देर शाम—को झगड़ा बढ़ा, तो कथित तौर पर गुस्से में लालू ने घर में रखा एसिड पत्नी और दोनों बेटों पर फेंक दिया।
अस्पताल में हड़कंप
झुलसे हुए तीनों को फौरन अनुमंडल अस्पताल लाया गया। डॉक्टर सतीश कुमार के मुताबिक, सचिन कुमार की गर्दन, छाती व पेट का दायां हिस्सा तेजाब से बुरी तरह झुलस गया। उसकी हालत बेहद नाजुक है, इसलिए मधुबनी सदर अस्पताल रेफर किया गया है। रेखा देवी और रणवीर का भी उपचार जारी है।
पुलिस क्या कह रही है?
वारदात के बाद एसएचओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों ने आपसी सहमति से लिखित समझौता कर लिया है और FIR दर्ज नहीं कराई है। ऐसे में पुलिस कार्रवाई सीमित रह गई है। अब सवाल उठ रहा है—क्या आपसी समझौता इस गंभीर अपराध की गंभीरता को कम कर सकता है?।
एसिड अटैक के मामले
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, भारत में हर साल औसतन 200 से ज्यादा एसिड अटैक केस दर्ज होते हैं, जिनमें से अधिकतर घरेलू विवाद अथवा पारिवारिक झगड़ों से जुड़े होते हैं। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने देश में एसिड की बिक्री पर सख्त नियम लागू करने के आदेश दिए थे, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका पालन कमजोर है।
IPC की धारा 326A: क्या है सजा?
एसिड अटैक IPC की धारा 326A के तहत गंभीर अपराध है। इसमें दोषी को कम-से-कम 7 साल और अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। पीड़ित परिवार द्वारा FIR दर्ज न कराने से पुलिस की कार्रवाई बाधित हो सकती है।




