40 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा गया ड्रग्स इंस्पेक्टर, निगरानी की टीम ने की कार्रवाई
सदर अस्पताल परिसर में कार्यालय से हुई गिरफ्तारी, सरकारी काम के एवज में मांगी थी रिश्वत; पूछताछ जारी, अस्पताल परिसर में मचा हड़कंप
अरवल: सदर अस्पताल परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल मच गया, जब पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की एक विशेष टीम ने ड्रग्स इंस्पेक्टर शैलेंद्र नारायण को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उनके सदर अस्पताल परिसर स्थित कार्यालय कक्ष से की गई, जिसके बाद परिसर में कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, ड्रग्स इंस्पेक्टर शैलेंद्र नारायण पर किसी सरकारी काम को अंजाम देने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप था। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को इस संबंध में पहले ही पुख्ता जानकारी मिल चुकी थी। टीम ने पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाया था। जैसे ही ड्रग्स इंस्पेक्टर ने रिश्वत के पैसे लिए, निगरानी की टीम ने उन्हें तत्काल दबोच लिया। यह कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति कुछ समझ नहीं पाया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ड्रग्स इंस्पेक्टर के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद निगरानी टीम ने यह कार्रवाई करने का निर्णय लिया। टीम के अधिकारियों ने बिना किसी देरी के सीधे कार्यालय कक्ष में दबिश दी और शैलेंद्र नारायण को रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद, टीम के द्वारा उनसे कार्यालय में ही घंटों पूछताछ की गई, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
घटना के बाद सदर अस्पताल परिसर में मौजूद कर्मचारी और मरीज के परिजन कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए। चारों ओर इस घटना की चर्चा होने लगी। लोग दबे जुबान से ड्रग्स इंस्पेक्टर के कामकाज और इस तरह की हरकतों पर बात करते दिखे। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ड्रग्स इंस्पेक्टर को पटना ले जाया गया है, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया है और यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस और निगरानी की टीम ने इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि शैलेंद्र नारायण को जल्द ही न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। इस गिरफ्तारी ने जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक मजबूत संदेश दिया है और उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य सरकारी विभागों में भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है।




