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डोंगरगढ़ रोपवे हादसे की जांच अधूरी, अस्थायी इंतजामों के सहारे फिर शुरू हुआ संचालन

 

डोंगरगढ़ : मां बम्लेश्वरी मंदिर तक जाने वाला रोपवे एक बार फिर शुरू हो चुका है, लेकिन 24 अप्रैल को हुए ट्रॉली हादसे की असली वजह अब तक सामने नहीं आई है। जांच अधूरी है, किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई है, और सुरक्षा इंतजाम अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं।

हादसे के बाद प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने दावा किया था कि जब तक स्थायी सुधार नहीं होंगे, तब तक रोपवे बंद रहेगा। लेकिन महज डेढ़ महीने बाद संचालन दोबारा शुरू कर दिया गया है।

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मैनुअल ब्रेक से ट्रॉली रोकने का अस्थायी उपाय

जहां ट्रॉली हादसे का शिकार हुई थी, वहां से दो मीटर पहले एक अस्थायी चबूतरा बना दिया गया है। अब ट्रॉली को मैनुअल ब्रेक से वहीं रोका जाता है और श्रद्धालुओं को उसी जगह उतारा जाता है। इसके बाद ट्रॉली को हाथ से खींचकर आगे ले जाया जाता है।

यह व्यवस्था दर्शाती है कि तकनीकी सुधार केवल कागज़ों पर हैं और वर्तमान में पूरी प्रणाली मानवीय प्रयासों पर निर्भर है, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।

मंदिर ट्रस्ट का दावा: दो माह में स्थायी समाधान

मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि NIT रायपुर और विशेषज्ञों की टीम ने सर्वे कर निर्देश दिए हैं, जिनके आधार पर चबूतरे की व्यवस्था की गई है। दो से तीन महीनों में स्थायी निर्माण किया जाएगा। एनआईटी और रोपवे कंपनी ने संचालन की सशर्त अनुमति दी है।

एसडीएम अभिषेक तिवारी ने भी पुष्टि की कि संचालन दिशा-निर्देशों के अनुरूप शुरू किया गया है, लेकिन सुधार की प्रक्रिया अभी जारी है।

 

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सबसे बड़ा सवाल: क्या अस्थायी इंतजामों के बीच फिर से जोखिम?

हादसे की जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी है। न तो हादसे की वास्तविक वजह सामने आई है, न ही किसी को दोषी ठहराया गया है। इसके बावजूद रोपवे का फिर से शुरू होना श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डालने जैसा है।

जब स्थायी समाधान अभी महीनों दूर है, तब तक इस मैनुअल व्यवस्था पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा कितनी भरोसेमंद है? और यदि फिर कोई हादसा हुआ तो क्या एक बार फिर “जांच करेंगे” कहकर जिम्मेदारी से बचा जाएगा?

 

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