राजगीर में रॉयल भूटान बौद्ध मंदिर: भारत-भूटान मैत्री और आध्यात्मिकता का नया मंच
भव्य खुलासा, राजगीर की पहचान को मिलेगी नया आयाम, बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में भी मददगार
राजगीर (नालंदा) : राजगीर की पवित्र धरती पर बुधवार को भव्य रूप से उद्घाटित हुआ रॉयल भूटान बौद्ध मंदिर न केवल भूटान और भारत के बीच मैत्री का प्रतीक है, बल्कि यह दोनों देशों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को नई दिशा देने वाला केंद्र भी है।
70 करोड़ रुपये से निर्मित यह मंदिर भूटानी परंपरा के अनुरूप पारंपरिक वास्तुकला में सजाया गया है, जहां लकड़ी की नक्काशी, रंगीन चित्रांकन और ऊंचे स्तूप जैसे आकर्षण उपस्थित हैं। मंदिर परिसर में स्थापित बुद्ध प्रतिमा और भूटानी धार्मिक चित्र (थांका पेंटिंग्स) श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव को समृद्ध करते हैं।

राजगीर, जो स्वयं भगवान बुद्ध की तपोभूमि और कर्मभूमि के रूप में विख्यात है, अब इस मंदिर के साथ एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में उभरेगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय भक्तों और पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और भूटान के मुख्य भिक्षु जे खेम्पो द्वारा उद्घाटन समारोह में साझा किए गए संदेशों ने शांति, करुणा और मानवता का संदेश दिया, जो आने वाली पीढ़ियों को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करेगा।

यह मंदिर भारत-भूटान के सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अध्यात्मिक मेल का अद्भुत उदाहरण है, जो दोनों देशों के बीच गहरे मित्रता के बंधन को और मजबूत करेगा। साथ ही यह राजगीर को विश्व स्तर पर एक प्रमुख बौद्ध धर्म संस्कृति केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करेगा।




