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पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड: नौ साल बाद मिला न्याय, तीन दोषियों को आजीवन कारावास

विशेष सीबीआई कोर्ट का अहम फैसला, 30-30 हजार का जुर्माना भी; लोकतंत्र और पत्रकारिता के लिए बड़ी जीत

मुजफ्फरपुर: सीवान के जाने-माने पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के नौ साल पुराने सनसनीखेज मामले में आज न्याय की जीत हुई है। विशेष सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को तीन मुख्य दोषियों — रोहित कुमार सोनी, विजय कुमार गुप्ता और सोनू कुमार — को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद, तीनों दोषियों को 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।

न्यायाधीश नमिता सिंह की अदालत ने हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और आर्म्स एक्ट के तहत यह फैसला सुनाया। सजा के ऐलान के तुरंत बाद, तीनों को शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा भेज दिया गया। अदालत ने मृतक पत्रकार की पत्नी आशा यादव को मुआवजा दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भी भेजा है, ताकि उन्हें कानूनी सहायता मिल सके।

क्या थी नौ साल पुरानी सनसनीखेज वारदात?
यह घटना 13 मई 2016 की शाम की है, जब सीवान रेलवे स्टेशन के पास पत्रकार राजदेव रंजन को बेखौफ बदमाशों ने ताबड़तोड़ पांच गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया था। राजदेव रंजन उस समय एक दैनिक अखबार के ब्यूरो प्रमुख के रूप में काम कर रहे थे। शुरुआती जांच सीवान पुलिस ने की थी, जिसने सात आरोपियों की पहचान की थी। हालांकि, बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने अपनी जांच में पूर्व सांसद शहाबुद्दीन सहित आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन ट्रायल के दौरान कोरोना काल में शहाबुद्दीन का निधन हो गया था।

कैसे हुआ था हत्याकांड?
सीबीआई ने अपनी दलील में बताया कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए तीन मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया गया था। पहली बाइक (सफेद अपाचे) पर रिशु कुमार जायसवाल था, जबकि उसके पीछे बैठे रोहित सोनी ने राजदेव रंजन पर गोलियां चलाईं। दूसरी बाइक विजय कुमार गुप्ता चला रहा था। तीसरी बाइक एक किशोर चला रहा था, जिसके पीछे राजेश कुमार बैठा था। जांच में यह भी सामने आया था कि रिशु जायसवाल को सीवान जेल से हथियार और 15 हजार रुपये मिले थे। हत्या का मुख्य कारण ‘सच छापने की वजह से नाराजगी’ बताया गया।

बचाव पक्ष और सीबीआई की दलीलें
अदालत में सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक राकेश दूबे ने सभी साक्ष्य और गवाहों के बयानों से आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को साबित किया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील शरद सिन्हा ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेंगे। गौरतलब है कि इसी मामले में 30 अगस्त को तीन अन्य आरोपी— लड्डन मियां, राजेश कुमार और रिशु कुमार जायसवाल — को बरी कर दिया गया था। सीबीआई ने पहले ही घोषणा की है कि वह इस फैसले को भी ऊपरी अदालत में चुनौती देगी।

फैसले का महत्व

राजदेव रंजन हत्याकांड ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारिता की आवाज दबाने की एक बड़ी साजिश के रूप में देखा गया था। नौ वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला न केवल पत्रकारिता की सुरक्षा के लिए बल्कि देश की न्याय व्यवस्था पर भी लोगों का भरोसा मजबूत करता है।

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