
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर सप्ताह में छह कार्यदिवस की प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत पुलिस विभाग से कर दी गई है। डीजीपी ने आदेश जारी कर शनिवार की छुट्टी रद्द कर दी है। अब पुलिस मुख्यालय में सभी अधिकारी और कर्मचारी शनिवार को भी उपस्थित रहेंगे। हालांकि, इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध किया है और कांग्रेस ने इसे मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
क्यों लिया गया फैसला?
डीजीपी ने आदेश में कहा है कि समयसीमा के भीतर लंबित मामलों के निराकरण और प्रशासनिक गति को तेज करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। सभी एडीजी, शाखा प्रभारी और सहायक पुलिस महानिरीक्षक को शनिवार को कार्यालय में उपस्थित रहने को कहा गया है।
कर्मचारी संगठन और कांग्रेस का विरोध
कर्मचारी संगठन के प्रमुख कमल वर्मा ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जनता और कर्मचारियों के हित में लागू की थी। वर्मा के अनुसार, “अब इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत समाप्त किया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों में भी 5 दिवसीय कार्य संस्कृति जारी है।”
वहीं कांग्रेस ने शनिवार की छुट्टी खत्म करने के फैसले को मानवाधिकार का उल्लंघन करार दिया है। पार्टी का कहना है कि पुलिस विभाग की कार्यदशा और संसाधनों की कमी को देखते हुए पूर्व सरकार ने यह सुविधा दी थी, लेकिन अब सरकार राहत छीन रही है।
जनता की राय – काम में आएगी तेजी
हालांकि, आम जनता के एक वर्ग ने इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि शनिवार को छुट्टी के चलते कई बार सरकारी कार्यालयों में जरूरी काम नहीं हो पाते थे। अब सप्ताह में छह दिन काम होने से दफ्तरों की कार्य क्षमता बढ़ेगी और समस्याओं का निपटारा जल्दी हो सकेगा।
क्या कहती है सरकार?
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस मुद्दे पर कहा कि सरकार की योजनाओं को बेहतर रूप से जनता तक पहुंचाने और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए यह कदम आवश्यक है। उन्होंने कहा, “कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और जनता को समय पर सेवाएं देने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।”
जल्द ही सभी विभागों में लागू हो सकती है व्यवस्था
फिलहाल यह आदेश केवल पुलिस विभाग तक सीमित है, लेकिन आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जल्द ही राज्य सरकार अन्य विभागों में भी शनिवार की छुट्टी खत्म करने का आदेश जारी कर सकती है। हालांकि, अभी इस पर विधिवत अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों को खुश करने के लिए सप्ताह में 5 दिवसीय कार्य प्रणाली लागू की थी, लेकिन उस व्यवस्था में समय की पाबंदी और जिम्मेदारी की कमी के चलते जनता को समय पर सेवाएं नहीं मिल पा रही थीं। अब सरकार 6 दिन की कार्यप्रणाली को वापस लाने की कोशिश में है ताकि प्रशासनिक कार्यों में गति और पारदर्शिता लाई जा सके।
यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके राजनीतिक और सामाजिक असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।




