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लैंडिंग से पहले पत्थर से टकरा गया Luna-25! वैज्ञानिकों को मिली ये जानकारी, जाने ताजा अपडेट…

रूस का मून मिशन लूना-25 मुश्किल में पड़ गया है. रूसी यान ऑर्बिट बदलने के समय ‘तकनीकी खराबी’ का शिकार हो गया. अभी साफ नहीं है कि असल में रूसी मिशन के साथ क्या हुआ. क्या रूस 50 साल बाद चांद पर उतरने की अपनी कोशिशों में फेल कर गया? क्या लूना क्रैश कर गया या क्या असफलता के बाद मिशन को फिर से चांद की सतह पर भेजने की कोशिश होगी? ये सभी वो सवाल हैं जो रूसी मून मिशन को लेकर उठ रहे हैं. आइए समझते हैं.

रूस ने भारत के चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के कमोबेश एक महीने बाद 10 अगस्त को लूना-25 लॉन्च किया. भारतीय मिशन से दो दिन पहले 21 अगस्त को रूस का चांद के साउथ पोल पर उतरने का टार्गेट था. लूना को चंद्रयान-3 के साथ ही प्री-लैंडिंग ऑर्बिट यानी चांद के करीब भेजने की कोशिश की जा रही थी, जब “असामान्य स्थिति” पैद हो गई. हालांकि, चंद्रयान-3 इसमें सफल हुआ और अपने आगे के सफर पर निकल गया. रूस का लूना-25 यहां पीछे रह गया.

रूस के मून मिशन लूना-25 के साथ असल में क्या हुआ?

रूसी स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस शनिवार को लूना को चांद के और करीब भेजने की कोशिश कर रहा था. इस दौरान कुछ ऐसा हुआ जिससे वैज्ञानिकों में मायूसी छा गई. रूसी यान में तकनीकी खराबी आ गई. लैंडर मॉड्यूल का ऑर्बिट नहीं बदला जा सका. चांद के करीब जाने में असफल हो गया. स्पेस एजेंसी ने इस बात की जानकारी खबर लिखे जाने तक नहीं दी है कि लूना-25 की शेड्यूल के मुताबिक ही लैंडिंग होगी या फिर मिशन फेल कर गया?

रूस ने बताया कि लूना के बारे में वैज्ञानिक पता लगाने में जुटे हैं. वैज्ञानिकों को शुरुआत में चांद की मिट्टी के रासायनिक तत्वों के बारे में जानकारी मिली. शुरुआती आंकड़ों के आधार पर एजेंसी ने बताया कि लून-25 पर हो सकता है कि माइक्रोमेटेरियोरॉइट का प्रभाव पड़ा हो. माइक्रोमेटेरियोरॉइड, आमतौर पर अंतरिक्ष में बड़े पत्थरों या लोहे से टूटे हुए छोटे-छोटे कण होते हैं. ये छोटे-छोटे टुकड़े स्पेसक्राफ्ट या सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं. इसके बड़े टुकड़े कई बार स्पेसक्राफ्ट या सैटेलाइट के क्रैश करने का भी कारण बनते हैं. किसी अंतरिक्ष यान के इंटरनल पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं. हालांकि, रूस ने इस बारे में कुछ स्पष्ट जानकारी नहीं दी है.

रूसी मून मिशन के लैंडिंग पर संशय

लूना-25 को 21 अगस्त को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने का टार्गेट था. उम्मीद थी कि रूस 50 साल बाद अपने इस मिशन में सफल होगा. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि असल में रूसी मिशन चांद पर पहुंच पाएगा या नहीं. रूसी स्पेस एजेंसी ने अभी साफ नहीं किया है कि तय शेड्यूल के मुताबिक ही लैंडिंग की कोशिश होगी या इसमें कुछ बदलाव किया जाएगा. यह भी स्पष्ट नहीं है कि हालिया घटना लैंडिंग में बाधा बनेगी या नहीं. पिछले दिनों रूसी लूना ने चांद के सतह की तस्वीरें भी क्लिक की थी.

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