वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर राज्यसभा में घमासान: भाजपा ने कांग्रेस पर लोकतंत्र न समझने का आरोप लगाया
सुधांशु त्रिवेदी बोले—"बीस साल में भी मतदाता सूची सुधार को तैयार नहीं हुई कांग्रेस"

नई दिल्ली : राज्यसभा में गुरुवार को चुनावी सुधारों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर लोकतंत्र की प्रक्रियाओं को “अब तक न समझ पाने” का गंभीर आरोप लगाया।
चर्चा में भाग लेते हुए त्रिवेदी ने कहा कि आजादी के बाद से चुनाव प्रणाली कई बदलावों से गुजरी, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने समय-समय पर “अपनी जरूरत के हिसाब से” नियमों में परिवर्तन किया। उन्होंने संप्रग सरकार के दौरान लाभ के पद से जुड़े प्रावधान में बदलाव का भी उल्लेख किया।
त्रिवेदी ने कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल का आईना देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राजग सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चुनावी चंदे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश की।
पूर्व की चुनावी स्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “जिस समय मतपत्रों की पेटियां लूटी जाती थीं, बूथ कैप्चरिंग और गोलियां चलती थीं, उस समय कांग्रेस को बहुमत मिलता था। आज चुनाव प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी और ईवीएम के तहत अधिक सुरक्षित हुई है।”
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठे विवाद पर त्रिवेदी ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने 18 दिसंबर 1950 को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को हर छह महीने में किए जाने की बात कही थी। “लेकिन व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने इसे एक वर्ष में करने को कहा। कांग्रेस बीस वर्षों में भी इस दिशा में कदम आगे नहीं बढ़ाना चाहती,” उन्होंने आरोप लगाया।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत को दुनिया में लोकतंत्र की जननी माना जाता है और इसकी जीवंतता इसकी विविध संस्कृति में निहित है। “फिर भी हमारे देश के कुछ लोग विदेश जाकर कहते हैं कि यहां लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है।”
त्रिवेदी ने यह भी कहा कि आंबेडकर ने समानता, बंधुता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को विदेशी नजरिये से देखने की धारणा को खारिज किया था।




