नालंदा में 20 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा ‘थिक-मिन्ह-चाऊ ऑडिटोरियम’
भारत-वियतनाम के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
राजगीर, नालंदा: प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की भूमि पर एक बार फिर ज्ञान और संस्कृति का नया अध्याय शुरू हो रहा है। नव नालंदा महाविहार के मुख्य परिसर में 24 सितंबर 2025 को वियतनामी मॉडल पर आधारित “थिक-मिन्ह-चाऊ ऑडिटोरियम” का भूमि पूजन और शिलान्यास भव्य समारोह के साथ संपन्न हुआ। यह ऑडिटोरियम भारत और वियतनाम के बीच गहरे होते सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों का प्रतीक है।
ऑडिटोरियम की प्रमुख विशेषताएं:
यह ऑडिटोरियम 20 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा, जो नव नालंदा महाविहार और वियतनाम इंस्टिट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के सहयोग से तैयार होगा। इसमें 600 दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी और इसका डिज़ाइन वियतनामी आर्किटेक्चर और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम होगा। इसका उद्देश्य शिक्षा, ध्यान और संस्कृति के लिए एक नए केंद्र के रूप में विकसित होना है, जहाँ बौद्ध दर्शन, शांति और करुणा की शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
ऐतिहासिक समझौता और समारोह:
शिलान्यास समारोह के दौरान दोनों संस्थाओं के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत-वियतनाम सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा और बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक शिक्षा परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की पहल है। समारोह में वियतनामी बौद्ध गुरु थिक-नात-तु भी उपस्थित थे, जिन्होंने युवाओं को ज्ञान, बौद्धिक समृद्धि और सद्भावना की ओर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
एक नया सांस्कृतिक केंद्र:
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नालंदा को एक बार फिर विश्व शिक्षा-संस्कृति और बौद्धिक संवाद का प्रमुख केंद्र बनाना है। ऑडिटोरियम में भविष्य में क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन, शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय और वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नया आयाम मिलेगा।




