जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और भूस्खलन की दो बड़ी घटनाएं : 11 की मौत का अंदेशा, कई लापता
रामबन में बादल फटने से तीन ग्रामीणों की मौत, रियासी में मकान पर भूस्खलन गिरने से दंपति और पांच मासूम दबे

जम्मू: जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर तबाही मचा दी है। शनिवार सुबह रामबन और रियासी जिलों में दो अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 11 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन के मुताबिक, राहत एवं बचाव अभियान जारी है।

रामबन: बादल फटा, तीन की मौत, कई लापता
अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह रामबन जिले की राजगढ़ तहसील में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई। तीन ग्रामीणों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तेज धार में कई घर और संपत्तियां भी बह गईं। फिलहाल SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है।
रियासी: भूस्खलन से घर दबा, सात की मौत की आशंका
इसी दिन रियासी जिले के महोर इलाके में भारी बारिश के चलते भूस्खलन हुआ। मलबे के नीचे एक मकान दब गया। बताया जा रहा है कि घर में मौजूद सात लोगों की मौत हो गई है, जिनमें एक दंपति और उनके पांच मासूम बच्चे (सभी 12 साल से कम उम्र के) शामिल हैं। बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है, लेकिन अभी तक शव बरामद नहीं हो पाए हैं।

बारिश से लगातार कहर
पिछले दो हफ्तों से जम्मू क्षेत्र में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने कहर बरपाया है। अब तक 115 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। सबसे बड़ी घटना किश्तवाड़ के चिशोटी गांव में हुई थी, जहां मचैल माता यात्रा के दौरान बादल फटने से 65 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इसके अलावा वैष्णो देवी धाम के पास भूस्खलन में भी 30 लोगों की जान गई थी।
सरकार की कार्रवाई
इन घटनाओं के मद्देनज़र सरकार ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो भूस्खलन से हुई मौतों की जांच करेगी, बचाव-राहत कार्यों की समीक्षा करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेगी।
क्षेत्र में दहशत और नुकसान
लगातार बारिश और बाढ़ ने पूरे जम्मू क्षेत्र में हजारों करोड़ की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। कई गांव पानी और मलबे में घिर गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों और ढलानों के पास न जाएं।




