कश्मीर से दिल्ली और जम्मू तक अब सीधी रेल सेवा, ताजे सेब 23 घंटे में मंडियों तक
भारतीय रेलवे की नई पार्सल वैन सेवा से घाटी के बागवानों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभ, फलों की ताजगी और किसानों की आय होगी दोगुनी

दिल्ली: भारतीय रेलवे ने कश्मीर घाटी के बागवानों और फल व्यापारियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। अब उनके ताजे सेब, नाशपाती और अन्य फल सीधे रेलवे पार्सल वैन से दिल्ली और जम्मू पहुँच सकेंगे। 11 सितंबर से बडगाम स्टेशन से शुरू हो रही यह सेवा किसानों की आमदनी बढ़ाने और घाटी की अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने की दिशा में “गेम चेंजर” साबित होगी।
सुविधाजनक और तेज़ परिवहन
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दो विशेष पार्सल वैन चलाई जा रही हैं—एक दिल्ली के आदर्श नगर स्टेशन तक और दूसरी जम्मू के लिए। ये वैन रोजाना चलेंगी और करीब 23 घंटे में दिल्ली पहुंचेंगी। यह सड़क मार्ग की तुलना में कहीं तेज़ और भरोसेमंद है।
अतीत में अक्सर बारिश, बर्फबारी या भूस्खलन के कारण श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग दिनों तक बंद रहता था, जिससे हजारों टन फल मंडियों तक समय पर नहीं पहुँच पाते थे। इसके चलते किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। रेलवे की इस नई सुविधा से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
किसानों को सीधा लाभ
नए प्रावधान से बागवान और व्यापारी सीधे अपनी उपज दिल्ली और जम्मू जैसे बड़े बाजारों तक भेज पाएंगे। अब उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा और अपनी फसल का उचित दाम मिल सकेगा।
शोपियां के सेब उत्पादक अब्दुल मजीद ने कहा, “हमारे फल पहले ट्रकों में फँसकर खराब हो जाते थे। इस ट्रेन सेवा से उम्मीद है कि ताजे फल समय पर बाजारों तक पहुंचेंगे और हमें अच्छा दाम मिलेगा।”
घाटी की अर्थव्यवस्था को बल
कश्मीर के सेब, चेरी, नाशपाती और अखरोट की गुणवत्ता पूरे देश और विदेश में सराही जाती है। हर साल लाखों टन फल उत्पादन होता है, लेकिन खराब लॉजिस्टिक्स और सड़क मार्ग की दिक्कतों की वजह से घाटी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता था। विशेषज्ञ मानते हैं कि रेलवे की यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया आयाम देगी, रोजगार के अवसर बढ़ाएगी और कश्मीर के ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
रेलवे मंत्रालय की यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे को भी बल देती है। किसान अब न सिर्फ घरेलू बाजार बल्कि आगे चलकर निर्यात की दिशा में भी मजबूत स्थिति में होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि जब उपज समय पर बाजारों तक पहुंचेगी तो किसानों की आय स्वतः बढ़ेगी और घाटी के बागानों की मिठास देश के हर कोने तक आसानी से पहुंचेगी।




