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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने मनाया ‘बोरे-बासी दिवस’, भाजपा सरकार की चुप्पी चर्चा में

रायपुर : छत्तीसगढ़ में 1 मई को मजदूर दिवस के अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने ‘बोरे-बासी दिवस’ के रूप में परंपरा को एक बार फिर जीवित रखा। पार्टी नेताओं ने अपने घरों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन बोरे-बासी खाया और उसकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर श्रमिकों के सम्मान में यह दिन मनाया।

‘बोरे-बासी दिवस’ की शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जोड़ते हुए श्रमिकों को सम्मान देने का प्रतीक बनाया था। उस समय मंत्रियों से लेकर कलेक्टर, IAS और IPS अधिकारियों तक ने इस दिन बोरे-बासी खाते हुए तस्वीरें पोस्ट की थीं।

छत्तीसगढ़ में आज 1 मई को कांग्रेस पार्टी 'बोरे-बासी दिवस' के रूप में मजदूर दिवस मना रही है। - Dainik Bhaskar

भाजपा सरकार की ओर से कोई पहल नहीं

दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल भाजपा की सरकार बनने के बाद भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मजदूर दिवस पर बोरे-बासी खाकर श्रमिकों को बधाई दी थी और रायपुर में श्रमिकों को सम्मानित किया था। लेकिन इस बार उनके आधिकारिक शेड्यूल में न तो बोरे-बासी दिवस का कोई उल्लेख है और न ही किसी कार्यक्रम की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से अब तक इस दिन को लेकर कोई बयान या आयोजन की सूचना जारी नहीं की गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।

कांग्रेस नेता मोहन मरकाम भी बोरे-बासी खाते हुए, उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद।

कांग्रेस ने साधा निशाना

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बोरे-बासी दिवस केवल भोजन से जुड़ी परंपरा नहीं, बल्कि श्रमिकों के प्रति सम्मान की भावना का प्रतीक है, जिसे भाजपा सरकार ने इस बार नजरअंदाज कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर कई प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

सुशील आनंद शुक्ला छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख ने बोरे बासी खाते हुए।

 

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