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करोड़ों का गार्डन, विवादों का आंगन …

Garden worth crores, a source of controversies...

रायपुर रिपोर्टर:- सुधीर वर्मा

राजधानी रायपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों की लागत से बनकर तैयार हुआ एक भव्य गार्डन अब विवादों में फंस गया है। रायपुर नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोग्राम की संयुक्त पहल पर करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से इस गार्डन का निर्माण किया गया था। बता दे गार्डन का निर्माण पूर्ववर्ती कांग्रेस शासित शहर सरकार के कार्यकाल में कराया गया था और जिसके बाद बनकर तैयार भी हुआ। लेकिन सरकार बदलने के बाद इस गार्डन का उद्घाटन अब तक नहीं हो पाया है।

निगम अधिकारियों ने जिस जमीन पर यह गार्डन बनवाया, उस पर अब लोगों के दावे सामने आने लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि गार्डन की जमीन निजी है, जिसे एक सवाल यह भी उठता है कि जमीन निगम के अधिकारियों द्वारा जमीन का चयन करते समय जमीन का निरीक्षण क्यू नहीं किया आखिर इतनी बड़ी लापरवाही अधिकारियों द्वारा क्यू की गई या जो लोग जमीन होने का दावा कर रहे हैं उनके दस्तावेजों की पुष्टि अब तक क्यू नहीं की गई जिसके चलते यह पूरा प्रोजेक्ट अब विवादों में फंस चुका है।

…वहीं गार्डन को लेकर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि इससे बड़ी नाकामी नगर निगम की और क्या हो सकती है कि करोड़ों रुपये गार्डन के निर्माण पर खर्च करने के बाद भी उसका उद्घाटन अब तक नहीं हो पाया है। प्रदेश में सरकार को एक से डेढ़ साल का समय हो चुका है, वहीं शहर सरकार को भी एक साल पूरा होने जा रहा है। साथ ही जानकारी मिल रही है कि जमीन को लेकर भी विवाद चल रहा है। लेकिन जब जमीन का सीमांकन हो चुका है और रिपोर्ट भी आ चुकी है, तो उसकी जांच करके गार्डन का उद्घाटन क्यों नहीं किया जा रहा है? यह गार्डन जिन लोगों के लिए बनाया गया था, उसे जनता को सौंप देना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कई काम हुए थे, लेकिन अब केवल ‘नाम पट्टीका’ के चक्कर में उनके उद्घाटन को रोका जा रहा है। यदि इसी मानसिकता से काम होगा, तो रायपुर की जनता यह देख रही है कि भारतीय जनता पार्टी की शहर सरकार किस मानसिकता के साथ राजधानी में काम कर रही है।

 

रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने कहा कि, राजधानी रायपुर के भक्त माता कर्मा वार्ड में करोड़ों रुपए की लागत से पूर्व शहर सरकार के कार्यकाल में यह गार्डन बना था। पर वहां किसी प्रकार का कोई मार्ग नहीं था। गार्डन जाने के लिए इसलिए उद्घाटन का काम रुका हुआ था वहां सड़क बनाई जा रही है। ताकि लोग सरल तरीके से गार्डन तक पहुंच सके सड़क बनने के बाद गार्डन का उद्घाटन किया जाएगा।

इस पूरे मामले पर न तो नगर निगम के अधिकारी स्पष्ट बयान दे रहे हैं और न ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत जुड़ी एजेंसियां। गार्डन की हालत देख स्थानीय जनता में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को इसका लाभ कब मिलेगा? क्या जमीन विवाद का हल निकलेगा या यह गार्डन कागजों में ही सिमट जाएगा और उद्घाटन महज सपना बन कर रह जाएगा?

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