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भारत में तुर्की सेब का बहिष्कार तेज़: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को समर्थन देना पड़ा महंगा, 50% तक गिरी मांग

 

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तुर्की द्वारा पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई और खुला समर्थन देना अब उसके व्यापार पर भारी पड़ने लगा है। खासतौर पर तुर्की से आयात होने वाले सेबों का भारत में ज़बरदस्त बहिष्कार हो रहा है। ‘बॉयकॉट तुर्की’ का ट्रेंड देशभर में जोर पकड़ चुका है, जिससे तुर्की के सेब की मांग में 50% तक गिरावट दर्ज की गई है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में नाराज़गी

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमला किया, और इस पूरे घटनाक्रम में तुर्की द्वारा पाकिस्तान को ड्रोन की आपूर्ति किए जाने की रिपोर्ट्स सामने आईं। इसी के बाद से भारत में तुर्की के उत्पादों खासकर सेब का विरोध शुरू हो गया।

 

भारत में कितना सेब भेजता है तुर्की?

  • 2021-22: ₹563 करोड़ का सेब आयात
  • 2022-23: ₹739 करोड़
  • 2023-24: ₹821 करोड़

पिछले तीन वर्षों में तुर्की से भारत में सेब का आयात लगातार बढ़ता गया, जिससे घरेलू बागवानी क्षेत्र पर असर पड़ा। आयातित सेब सस्ते और सब्सिडी वाले होते हैं, जिससे कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे राज्यों के किसानों को नुकसान झेलना पड़ा।

बहिष्कार के कारण बदली व्यापार रणनीति

वर्तमान हालात में व्यापारी अब तुर्की की जगह सेब की आपूर्ति के लिए कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान, वाशिंगटन और न्यूजीलैंड जैसे विकल्पों पर भरोसा कर रहे हैं। तुर्की के सेब मीठे और रसदार होने के कारण ऑफ-सीजन में भी लोकप्रिय रहते थे, लेकिन अब उनकी बिक्री में भारी गिरावट देखी जा रही है।

 

तुर्की को होगा आर्थिक झटका

भारत में तुर्की के सेब की मांग घटने से तुर्की को प्रमुख निर्यात बाजार में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह असर उसके कृषि और बागवानी निर्यात क्षेत्र पर भी दिखेगा, जो पहले से ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है।

भारत में व्यापारिक और उपभोक्ता स्तर पर चल रहा तुर्की का बहिष्कार यह संकेत देता है कि अब केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भारत सख्त रवैया अपना रहा है।

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