अभिभावक ध्यान दें…..कहीं आपका बच्चा भी इस हिंसक ग्रुप का हिस्सा तो नहीं बन रहा
'प्रोटेक्शन गैंग' का खौफ: स्कूल-कॉलेज के छात्रों को बना रहे शिकार, विरोध करने वालों पर जानलेवा हमले; रंगदारी और नशे के धंधे से जुड़ा नेटवर्क
मुजफ्फरपुर: बिहार में इन दिनों अपराध का एक नया और खतरनाक चेहरा सामने आया है। ‘प्रोटेक्शन गैंग’ नाम से सक्रिय यह गिरोह खासकर बच्चों और किशोरों को अपना निशाना बना रहा है। हाल ही में अहियापुर थाना क्षेत्र में युवक मोहम्मद कैफ पर हुए जानलेवा हमले ने इस गैंग की कार्यप्रणाली और खौफनाक हकीकत को उजागर कर दिया। कैफ पर हमला सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि उसने इस गैंग में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
क्या है ‘प्रोटेक्शन गैंग’?
स्थानीय पुलिस और जांच से पता चला है कि यह गिरोह खुद को ‘सुरक्षा देने वाला ग्रुप’ बताता है, जबकि हकीकत में यह संगठित अपराध में लिप्त है। इसमें शामिल युवक रंगदारी वसूली, मारपीट, चोरी-छीना-झपटी और नशे का धंधा करते हैं।
गैंग का टारगेट मुख्य रूप से स्कूल और कॉलेज के छात्र होते हैं। पहले दोस्ती और सहयोग का झांसा देकर बच्चों को जोड़ा जाता है, फिर धमकाकर उन्हें गिरोह का हिस्सा बनने के लिए मजबूर किया जाता है।
विरोध करने वालों का अंजाम
गैंग में शामिल होने से इनकार करने वालों या इसे छोड़ने की कोशिश करने वालों को बेरहमी से पीटा जाता है। कई मामलों में जानलेवा हमले और हत्याएं तक हुई हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में मुजफ्फरपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में इस गैंग से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं।
बड़ी बड़ी घटनाओं को दे रहे अंजाम
मोहम्मद अफरोज की हत्या (मिठनपुरा): मिठनपुरा थाना क्षेत्र में छात्र मोहम्मद अफरोज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पता चला कि हत्या के पीछे ‘प्रोटेक्शन गैंग’ का हाथ था।
एटीएम से वसूली: एक घटना में गैंग के युवकों ने राकेश पटेल के बेटे से मारपीट की और उसके एटीएम से करीब एक लाख रुपये जबरन निकाल लिए।
आरबीटीएस कॉलेज के पास हमला: यहां एक छात्र को गैंग के सदस्यों ने सरेआम बेरहमी से पीटा।
नशे का धंधा: पुलिस ने गैंग के सरगना हर्ष को गिरफ्तार किया था। उसके पास से स्मैक की कई पुड़िया बरामद हुई थीं। यह साफ हुआ कि गैंग नशे के कारोबार से भी जुड़ा है और इसी बहाने नए युवाओं को अपने जाल में फंसाता है।
क्यों है यह स्थिति चिंताजनक?
रंगदारी और खूनी झगड़े लगातार बढ़ रहे हैं। छात्र अपराध और नशे की दलदल में धंस रहे हैं। तिरहुत रेंज के डीआईजी ने भी इन गैंग की गतिविधियों को ‘संगठित अपराध’ की श्रेणी में रखा है। किशोर अपराध और गैंग की वजह से बच्चों का करियर और भविष्य खतरे में पड़ रहा है।
पुलिस और प्रशासन की चुनौतियां
पुलिस ने कई बार कार्रवाई करते हुए गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। स्पेशल टीम भी बनाई गई है। लेकिन हर बार गिरफ्तारियों के बाद भी यह गैंग फिर सक्रिय हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर भी हस्तक्षेप की जरूरत है।
समाधान क्या?
अभिभावकों की भूमिका: बच्चों की गतिविधियों और दोस्तों पर पैनी नजर रखें।
स्कूल-कॉलेज में निगरानी: संस्थानों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।
जागरूकता अभियान: बच्चों को इस गैंग की असलियत समझाई जाए, ताकि वे झांसे में न आएं।
सख्त कार्रवाई: पुलिस को नशे और रंगदारी के धंधों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी, ताकि गैंग की रीढ़ टूट सके।
‘प्रोटेक्शन गैंग’ अब एक गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है। यह न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि बच्चों और किशोरों के उज्ज्वल भविष्य पर भी बड़ा खतरा है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन, अभिभावक और समाज मिलकर इस नई आपराधिक प्रवृत्ति को रोक पाएंगे या फिर यह गैंग आने वाली पीढ़ियों के लिए और भी खतरनाक साबित होगा?




