UNSC में भारत का सख्त संदेश: अफगानिस्तान से अब नहीं चलेगा आतंक का खेल
लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद पर निशाना, अफगानिस्तान को आतंकी ठिकाना बनने से रोकने की अपील
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क : भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं होगा। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत ने दुनिया से अपील की कि अफगानिस्तान की ज़मीन को आतंकियों के अड्डे में बदलने की कोशिशें रोकी जाएं।
भारत ने इस दौरान सीधे-सीधे पाकिस्तान में पल रहे दो बड़े आतंकी संगठनों – लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) – का नाम लिया। भारत का कहना है कि ये दोनों संगठन, साथ ही उनके मददगार, अफगानिस्तान की अस्थिरता का फायदा उठाकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं, और अब इन्हें रोकना बेहद ज़रूरी है।
भारत का साफ संदेश
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश ने UNSC को संबोधित करते हुए कहा:“अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकी संगठन और उनके सहयोगी, जैसे ISIL, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद, अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए न कर पाएं।”
भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद सुरक्षा हालात पर पूरी दुनिया की नजर है। कई देशों को डर है कि अफगानिस्तान फिर से चरमपंथ और आतंकवाद का गढ़ न बन जाए।
जैश कमांडर का चौंकाने वाला कबूलनामा
भारत की इस चेतावनी से ठीक पहले जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर मसूद इलयास कश्मीरी का एक वीडियो सामने आया। यह वीडियो जैश से जुड़े टेलीग्राम चैनलों पर पोस्ट हुआ था।
करीब 15 मिनट के इस वीडियो में कश्मीरी ने माना कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में बड़ा हमला किया। उसने बताया कि 7 मई को “मरकज़ सुब्हान अल्लाह” (Markaz Subhan Allah) पर किए गए इस ऑपरेशन में जैश सरगना मौलाना मसूद अज़हर के परिवार के कई सदस्य मारे गए।
वीडियो में कश्मीरी भारी सुरक्षा घेरे में बैठा दिखा, जिसके पीछे पाकिस्तानी आर्मी के कमांडो मौजूद थे। उसने कहा कि जैश ने “सब कुछ कुर्बान किया” लेकिन भारत ने एक झटके में अज़हर के परिवार को तबाह कर दिया।
क्यों अहम है भारत की चिंता?
भारत लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है कि पाकिस्तान के आतंकी गुट न सिर्फ भारत के खिलाफ बल्कि पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। अफगानिस्तान की अस्थिर स्थिति इन संगठनों को और मौके दे रही है।
लश्कर-ए-तैयबा: 2008 के मुंबई हमले (26/11) के पीछे यही संगठन था।
जैश-ए-मोहम्मद: 2019 के पुलवामा हमले के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
भारत का कहना है कि जब तक इन संगठनों को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
भारत का सख्त रुख और दुनिया की जिम्मेदारी
भारत ने UNSC में यह भी कहा कि सिर्फ बयानबाज़ी से काम नहीं चलेगा। ज़रूरत है कि दुनिया मिलकर ऐसे गुटों और इन्हें मदद देने वाले देशों पर कड़ी कार्रवाई करे। आतंकी संगठनों को फंडिंग और हथियार मिलना बंद होना चाहिए। जो देश इन्हें शह देते हैं, उनकी जवाबदेही तय हो। अफगानिस्तान को दोबारा आतंकी हब बनने से रोकने के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग ज़रूरी है।
नतीजा क्या निकलता दिख रहा है?
भारत का यह सख्त रुख और जैश कमांडर का कबूलनामा मिलकर एक बड़ा संदेश दे रहे हैं एक तरफ भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ माहौल बना रहा है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान और उसके आतंकी गुटों की पोल खुद उनके लोग खोल रहे हैं। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में भारत आतंकवाद के खिलाफ और भी आक्रामक कूटनीति अपनाएगा।





