बिहार विधानसभा चुनाव 2025: सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन दलों में जारी खींचतान
राजग और महागठबंधन में सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने की कोशिश, छोटे सहयोगी दलों की मांगें जटिलता बढ़ा रही हैं

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के एलान के बाद राज्य की सियासत में सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन दलों के बीच खींचतान तेज हो गई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी महागठबंधन दोनों अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन क्षेत्रीय छोटे दलों की मांगें बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
राजग के भीतर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) कम से कम 20 सीटों की मांग कर रही है, जबकि उन्हें आधे से भी कम सीटें देने का प्रस्ताव मिला है। मांझी की नाराजगी के चलते वे दिल्ली रवाना हो गए हैं, जहां बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान से उनकी बातचीत बेनतीजा रही। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा के बीच लगभग 100-100 सीट पर सहमति बनी दिख रही है, लेकिन छोटे सहयोगी दलों जैसे चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की मांगें विवादित हैं। लोजपा (रामविलास) इस बार 45 से 54 सीटों की मांग कर रही है, हालांकि उन्हें 25 सीटें ऑफर की गई हैं।
दूसरी ओर महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी से तालमेल बनाने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सहनी ने शुरुआत में 60 सीटों की मांग की थी, हालांकि वे इसे घटाकर उपमुख्यमंत्री पद मिलने पर सहमत हैं। वहीं कांग्रेस ने अपनी मांगों में कटौती की है और करीब 55-60 सीटों पर सहमति बन रही है। वाम दलों ने भी सीट बंटवारे को लेकर जटिलता उत्पन्न की है, जिनमें से भाकपा (माले) ने 50 सीटों की मांग की है जबकि उन्हें लगभग 25 मिलने की संभावना है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव दो चरणों में कराने की घोषणा कर दी गई है। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान होगा। 14 नवंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा। कुल 7.42 करोड़ से अधिक मतदाता इस चुनाव में हिस्सा लेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार के इन चुनावों में गठबंधन दलों के समीकरण और सीट बंटवारे का फैसला राज्य की राजनीति को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गठबंधन दलों के बीच जल्द ही सहमति बनाना जरुरी है ताकि चुनावी तैयारियां सुचारू रूप से हो सकें।
इस चुनाव में सीट बंटवारे की जद्दोजहद जारी रहने से राजनीतिक माहौल में अनिश्चितता बनी हुई है, जिसे सुलझाने के लिए दोनों गठबंधनों पर दबाव बढ़ रहा है।




