‘चारा’ Vs. ‘वक्त’: 29 साल बाद, क्या लालू प्रसाद के लिए अब हर दिन अदालत में बजेगी खतरे की घंटी?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI कोर्ट का बड़ा कदम; बांका ट्रेजरी अवैध निकासी मामले की होगी रोजाना सुनवाई, राजनीतिक गलियारों में बेचैनी बढ़ी।

पटना: पटना स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े एक अहम मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है— अब इस मामले की सुनवाई रोज़ाना की जाएगी। यह फ़ैसला सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का परिणाम है, जिसमें पुराने और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर ज़ोर दिया गया था।

मामला भागलपुर के बांका उप कोषागार से पशुपालन विभाग के नाम पर जाली बिलों के आधार पर लगभग 45 लाख रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है। यह मामला 1996 में दर्ज हुआ था, जिसकी प्राथमिकी संख्या RC 63 A 96 है। CBI ने मूल रूप से 44 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था, जिनमें से कई की मृत्यु हो चुकी है।
न्यायाधीश राकेश कुमार ने इस मामले के सभी 18 शेष अभियुक्तों, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद भी शामिल हैं, को अदालत में उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश दिया है। अब तक लगभग 110 गवाहों की गवाही हो चुकी है, जबकि आरोपपत्र में 250 से अधिक गवाह सूचीबद्ध हैं।
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि रोज़ाना सुनवाई का यह निर्णय न केवल न्यायपालिका की सख्ती को दर्शाता है, बल्कि बिहार की राजनीति में भी गहमागहमी बढ़ाएगा। त्वरित सुनवाई से जल्द फैसला आने की संभावना है, जो लालू प्रसाद की पार्टी और राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। यह कदम एक बार फिर देश की न्याय प्रणाली में यह विश्वास बहाल करता है कि भले ही प्रक्रिया लंबी हो, लेकिन न्याय अंतिम सत्य होता है।




