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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर ग्रामीण अंचल में खुली ‘कबीर फुले बिरसा लाइब्रेरी’, वैज्ञानिक सोच और शिक्षा का बनेगी केंद्र

 

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर बसे दूरस्थ गांव कसेकरा में शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। विज्ञान आश्रम कसेकरा में स्थापित “कबीर फुले बिरसा लाइब्रेरी” का उद्घाटन रायपुर संभाग के कमिश्नर एम. डी. कावरे ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह लाइब्रेरी ग्रामीण क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अध्ययन की रुचि को बढ़ावा देगी।

कमिश्नर कावरे ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा कि जब लोग लाइब्रेरी की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो देश उन्नति की ओर बढ़ता है। उन्होंने सिरपुर की प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय परंपरा को याद करते हुए कहा कि यह नया प्रयास भी ज्ञान और शिक्षा के उसी धरोहर को आगे बढ़ाएगा।

संविधान की प्रतियां और बच्चों की पत्रिकाएं भेंट

कार्यक्रम में डिपार्टमेंटल इंक्वायरी कमिश्नर दिलीप कुमार वासनीकर ने लाइब्रेरी को भारत के संविधान की 10 प्रतियां भेंट कीं और इसे एक तपस्या जैसा कार्य बताया। वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली से आई प्रोफेसर हेमलता महिश्वर ने इसे बच्चों और बड़ों दोनों के मानसिक विकास का केंद्र बताया और बच्चों के लिए तीन बाल पत्रिकाएं (चकमक, एकलव्य, साइकिल) आजीवन भेजने की घोषणा की।

 

शिक्षा के प्रचार में समाज की भागीदारी

इस मौके पर कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पहल की सराहना की। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कोरबा के डीन डॉ. के के सहारे, भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर एल. उमाकांत, और एईएफ भिलाई के अध्यक्ष प्रभाकर खोबरागड़े, पूर्व बैंक अधिकारी पूनम लाला, छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के राज्य सचिव डॉ. वाय के सोना, और शिक्षाविद कल्याणी मुखर्जी समेत कई विद्वानों ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

लाइब्रेरी को समर्पित पुस्तकों की अलमारियां

लाइब्रेरी के लिए पुस्तक आलमारियां कई स्मृतियों में समर्पित की गईं—पिथोरा के फ्रैंक अगस्टिन नंद द्वारा अपने पिता इतिहासकार इब्राहीम नंद, रायगढ़ की कल्याणी मुखर्जी द्वारा अपनी बहन रंगकर्मी शिबानी मुखर्जी, और भिलाई के शकुंतला व एस.आर. सुमन द्वारा अपनी मेधावी बिटिया निहारिका सुमन की स्मृति में।

 

सक्रिय सहयोग और आयोजन की सराहना

कार्यक्रम का संचालन इंजी. एस. पी. निगम ने किया और डॉ. स्नेहलता हुमने ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कई शिक्षाविदों, इंजीनियरों, समाजसेवियों और विज्ञान प्रेमियों का योगदान रहा।

विज्ञान आश्रम के संचालक उषा मेश्राम और विश्वास मेश्राम ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों से ‘कबीर फुले बिरसा लाइब्रेरी’ का भरपूर उपयोग करने की अपील की।

यह पहल न केवल शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं के लिए ज्ञान और आत्मनिर्भरता का नया द्वार भी खोल रही है।

 

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