
रायपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले में दहेज के लिए बहू राधा बाई को जिंदा जलाने के जघन्य मामले में सास और पति को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। पीड़िता का मृत्युपूर्व बयान (Dying Declaration) इस मामले में निर्णायक साक्ष्य बना, जिसे अदालत ने विश्वसनीय और दबाव मुक्त मानते हुए दोषियों को सजा देना उचित ठहराया।
READ MORE : CG में मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: नौकरी का झांसा देकर युवती को बेचा, 7 आरोपी गिरफ्तार
🔹 क्या है पूरा मामला?
ग्राम धमनी निवासी राधा बाई की शादी 2015 में धनेश्वर यादव से हुई थी। शादी के बाद से पति और सास मंगली बाई लगातार दहेज की मांग करते हुए उसे प्रताड़ित करने लगे। प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि 1 सितंबर 2021 को राधा पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई।
गंभीर रूप से झुलसी राधा ने इलाज के दौरान 6 सितंबर को दम तोड़ दिया, लेकिन उससे पहले उसने मजिस्ट्रेट के सामने बयान देकर पति और सास को जिम्मेदार ठहराया।
🔹 कोर्ट का क्या रहा फैसला?
पुलिस ने घटनास्थल से जली हुई साड़ी, माचिस, कंबल समेत अन्य सबूत जब्त किए। साक्ष्य और राधा के बयान के आधार पर धारा 302, 304B और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ। सत्र न्यायालय, सक्ति ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह वैध ठहराया।
🔹 मृत्युपूर्व बयान बना न्याय का आधार
हाईकोर्ट ने कहा कि राधा बाई का मृत्युपूर्व बयान स्वतंत्र, सुसंगत और विश्वसनीय है। यह न्याय का मजबूत आधार बन सकता है, और इसी के आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला सही ठहराया गया।
🔹 कानूनी पहलू
यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली में Dying Declaration की ताकत और महत्व को रेखांकित करता है। जब पीड़िता के पास खुद की लड़ाई लड़ने का मौका नहीं होता, तब उसका आखिरी बयान ही उसका न्याय बनता है।




