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‘हामी नेपाल’ और GenZ मूवमेंट: नेपाल में एक नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत

भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी से नाराज़ युवाओं का आंदोलन अब नेपाल की सत्ता के केंद्र में—पुराने नेताओं के पतन के बाद एक नई पीढ़ी लोकतांत्रिक भविष्य गढ़ने की कोशिश में।

दिल्ली : नेपाल में इन दिनों एक नई राजनीतिक क्रांति का आगाज हुआ है, जिसमें खास भूमिका निभा रहा है एक संगठन जिसका नाम है “हामी नेपाल”। बहुत से लोग शायद इससे अनजान होंगे, लेकिन यही संगठन इस बार की युवाओं की आवाज़ यानी GenZ आंदोलन का मुख्य हिस्सा बना है। इस आंदोलन की बदौलत हाल ही में नेपाल की सरकार गिर गई और अब देश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी हो गई है।

“हामी नेपाल” क्या है?
हामी नेपाल एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो अपने आदर्श वाक्य “लोगों के लिए, लोगों द्वारा” के तहत जरूरतमंदों की मदद करती है। इसका मुख्य काम आपातकालीन समय में लोगों तक मदद पहुंचाना है, जैसे 2015 के भूकंप के बाद या कोरोना महामारी के दौरान। इसकी शुरुआत भी 2015 के भूकंप के बाद हुई थी, और 2020 में इसे और मान्यता मिली। इस संस्था का नेतृत्व कर रहे हैं सुदन गुरुंग, जो खुद 2015 में परिवार से बड़ा नुकसान झेल चुके हैं। इनके लाखों समर्थक हैं जो लगातार बढ़ रहे हैं।

GenZ आंदोलन कैसे शुरू हुआ?
नेपाल के युवा भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और जवाबदेही की कमी से तंग आ चुके थे। सोशल मीडिया पर भी सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने उनके गुस्से को और बढ़ा दिया। “हामी नेपाल” ने अपने इंस्टाग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विरोध प्रदर्शन का समन्वय किया और युवाओं को एक साथ लाया। इन युवाओं ने पुरानी राजनीति को बदलने और नई सरकार बनाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बीच भी हमी नेपाल ने चिकित्सकीय सहायता और सुरक्षा की व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों का एक समूह तैयार रखा।

हामी नेपाल की उपलब्धियां

इस संस्था ने कई सामाजिक कार्य किए हैं, जैसे महामारी के वक्त प्लाज्मा और ऑक्सीजन बैंक बनाना, आपदा राहत अभियान चलाना, बच्चों को स्कूल जैकेट बांटना और बाढ़ तथा भूकंप राहत अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाना। उनके अभियानों में पारदर्शिता और ईमानदारी दिखती है जो इस संगठन की सबसे बड़ी ताकत है।

GenZ का सोशल मीडिया पर प्रभाव
“हामी नेपाल” ने सोशल मीडिया पर #युवा_भ्रष्टाचार_के_खिलाफ जैसे कैंपेन चलाकर युवाओं को जोड़ने में सफलता पाई। टिकटॉक और अन्य प्लेटफॉर्म पर #नेपोबेबी ट्रेंड ने युवाओं के राजनीतिक सक्रियता को और बढ़ावा दिया। हालांकि सरकार के सोशल मीडिया प्रतिबंध और निगरानी की कोशिशों के कारण तनाव बढ़ा, लेकिन युवाओं की आवाज़ और आंदोलन तेज होता गया।

राजनीतिक बदलाव और भविष्य
8 सितंबर को हुई रैली में हजारों युवाओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों के दबाव में प्रधानमंत्री के पी ओली ने इस्तीफा दे दिया। “हामी नेपाल” अब जनादेश के अनुसार सरकार और सेना के साथ मध्यस्थता कर रहा है और देश के लिए नई दिशा तय करने में जुटा है।

युवा नेता सुदन गुरुंग और उनके समर्थकों ने प्रकट किया है कि वे केवल विरोध के लिए नहीं, बल्कि समाज में सार्थक बदलाव लाने के लिए लड़ रहे हैं। हालांकि विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी हुई, लेकिन गुरुंग ने शांति का समर्थन किया और कार्यकर्ताओं से हिंसा से दूर रहने की अपील की।

युवा नेतृत्व और राजनीति में बदलाव

“हामी नेपाल” और GenZ मूवमेंट ने नेपाल की राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। यह आंदोलन एक नई पीढ़ी की चेतना का प्रतिनिधित्व करता है, जो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सामाजिक असमानताओं से पूरी तरह नाराज़ है और बदलाव चाहता है।

हालांकि अभी स्थिति जटिल है, लेकिन इस युवा आंदोलन ने स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल की युवा पीढ़ी अब राजनीति में अपनी छाप छोड़ना चाहती है और सिस्टम को जवाबदेह बनाना चाहती है।

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