उत्तरी ओडिशा में नदियों का जलस्तर घटा, लेकिन 100 गांव अब भी जलमग्न; 30,000 लोग प्रभावित
बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों के कई गांवों में लगातार पांचवें दिन भी चार फुट तक बाढ़ का पानी जमा। हजारों लोग बेघर, राहत शिविरों में गुजर-बसर करने को मजबूर।

भुवनेश्वर। उत्तरी ओडिशा की प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ चुका है, लेकिन बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों के करीब 100 गांव शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन भी बाढ़ के पानी में डूबे रहे। एक अधिकारी ने बताया कि इन गांवों के लगभग 30,000 लोग प्रभावित हुए हैं।
बालासोर जिले के बलियापाल और भोगराई ब्लॉक के 80 गांव चार फुट तक पानी में डूबे हुए हैं। वहीं, जाजपुर जिले के दशरथपुर ब्लॉक के 14 गांवों में भी यही स्थिति बनी हुई है। भद्रक जिले के धामनगर ब्लॉक के कई इलाके भी अभी तक बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं।

स्थानीय निवासी रवींद्र सामल (दशरथपुर ब्लॉक) ने बताया – “वैतरणी नदी का जलस्तर कम हो गया है, लेकिन गांवों में पानी पिछले पांच दिनों से जमा है। इससे मेरा घर क्षतिग्रस्त हो गया, घरेलू सामान, अनाज और मवेशियों के लिए रखा चारा सब नष्ट हो गया।”
इसी ब्लॉक की एक युवती सविता ने कहा – “सरकार दावा कर रही है कि नदियों का जलस्तर घटने से स्थिति सुधरी है, लेकिन असलियत यह है कि गांवों में अब भी पानी भरा हुआ है। लोग राहत शिविरों में हैं, चूल्हा तक नहीं जल पा रहा, तो सुधार कैसे माना जाए?”
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, कानी नदी के तटबंध में करीब 100 फुट लंबी दरार आने से दशरथपुर ब्लॉक की कसपा और मलिकापुर पंचायतों के कम से कम 14 गांव जलमग्न हो गए। यहां 8,000 से अधिक लोग अब भी पानी के बीच रहने को मजबूर हैं।
अधिकारियों ने बताया कि शनिवार से अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इन्हें पास के स्कूल भवनों और अस्थायी राहत शिविरों में शरण दी गई है।




