Heartwarming Story: ‘कॉलर वाला दोस्त’ वापस लौटा! जमुई की झीलों ने साबित किया—क्यों है यह हजारों मील दूर के परिंदों का पसंदीदा घर
नागी-नकटी रामसर साइट पर 5000 से अधिक एशियाई जल पक्षी पहुंचे; B08 नंबर का राजहंस मंगोलिया से उड़कर ठीक उसी जगह वापस आया जहां उसे टैग किया गया था।

जमुई: सर्द हवाओं के साथ ही जमुई की फिजाओं में एक बार फिर मीठा कलरव गूंज उठा है। जिले के दो प्रसिद्ध रामसर स्थल—नकटी और नागी पक्षी आश्रयणी—इन दिनों हज़ारों आसमानी मेहमानों से भरे हैं। यह जगह मानो प्रकृति की सबसे खूबसूरत कविता बन गई है, जहाँ पंखों की सरसराहट और पानी पर तैरती कतारें देखने को मिल रही हैं।
एशियाई शीतकालीन जल पक्षी गणना का काम शुरू हो गया है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और बिहार वन विभाग इस जैविक उत्सव को मिलकर दस्तावेज़ कर रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
परिंदों की दुनिया हुई आबाद
सिर्फ दो दिनों की शुरुआती गणना में ही उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं:
नकटी: लगभग 3000 पक्षी और 35 प्रजातियां दर्ज की गईं।
नागी: लगभग 2000 पक्षी और 39 प्रजातियां दर्ज की गईं।
इनमें राजहंस (बार-हेडेड गूज), लालसर, सरार जैसे मुख्य विदेशी मेहमान बड़ी संख्या में दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यहाँ स्थानीय प्रजातियों की मौजूदगी भी बहुत अच्छी है, जो बताती है कि ये झीलें मेहमानों के साथ-साथ अपने स्थानीय बाशिंदों के लिए भी सुरक्षित पनाहगाह हैं।
‘B08’ की वफ़ादारी
इस साल की गिनती का सबसे खास और भावुक पल तब आया जब एक लाल कॉलर पहना राजहंस फिर से लौट आया। इसकी गर्दन पर B08 लिखा है। पिछली सर्दियों में BNHS ने इसे यहीं पर टैग किया था।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह पक्षी मंगोलिया या उसके आसपास के इलाकों से हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय करके ठीक उसी जगह लौटा है, जहाँ उसने पिछली बार सर्दियां बिताई थीं।
पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा ने कहा, “यह पक्षियों की मज़बूत स्मृति और प्रवास पैटर्न बताता है कि नागी-नकटी उनके लिए भरोसे का ठिकाना हैं।” इस वापसी को संरक्षण और स्थानीय जैव-विविधता के लिए सबसे मजबूत प्रमाण माना जा रहा है।
वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल ने कहा कि वन विभाग और स्थानीय समुदाय का सराहनीय सहयोग मिला है, जो दिखाता है कि संरक्षण अब साझी ज़िम्मेदारी बन रहा है।
यह तो बस शुरुआती गणना है। जनवरी-फरवरी में राज्य के 125 से अधिक जलाशयों में बड़े पैमाने पर फिर गणना होगी, लेकिन जमुई की इन झीलों ने शुरुआत में ही यह साबित कर दिया है कि यह धरती आज भी मुस्कुराती है।




