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गयाजी पितृपक्ष मेला में श्रद्धालुओं को 2500 बेड के टेंट सिटी में मिलेगी सुविधा, पर्यटन विभाग ने की विशेष तैयारी

6 से 21 सितंबर तक चलने वाले पितृपक्ष मेले के लिए गयाजी और पुनपुन में विशेष इंतजाम, पिंडदानियों के लिए आवास और मार्गदर्शन की व्यवस्था।

मुख्य बातें
आवासन: गयाजी के गांधी मैदान में 2500 बेड की विशेष टेंट सिटी का निर्माण।
मार्गदर्शन: मेला क्षेत्र में पर्यटक सूचना केंद्र और प्रशिक्षित गाइडों की तैनाती।
पुनपुन में लेजर शो: पुनपुन में पिंडदान और तर्पण की महिमा को दर्शाने के लिए लेजर शो का आयोजन।
विशेष पैकेज: बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा पितृपक्ष के लिए विशेष पैकेज की बुकिंग जारी।
आयोजन अवधि: पितृपक्ष मेला 6 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा।

पटना: धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले पितृपक्ष मेले के लिए बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की अनंत चतुर्दशी से शुरू होने वाला यह 15 दिवसीय महासंगम 6 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक गयाजी में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की शांति और मोक्ष के लिए पिंडदान करने गयाजी पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं की सुविधा और मेले को अविस्मरणीय बनाने के लिए बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने गयाजी में विशेष इंतजाम किए हैं। गयाजी शहर के गांधी मैदान में 2500 बेड वाली एक विशाल टेंट सिटी का निर्माण कराया गया है, ताकि तीर्थयात्रियों को आवास की कोई असुविधा न हो। इस टेंट सिटी में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ, 24 घंटे सूचना और सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित पर्यटक गाइड भी तैनात किए गए हैं।

इसके अलावा, गयाजी रेलवे स्टेशन पर एक पर्यटक सहायता केंद्र भी बनाया गया है। यहां पहले से ही एक स्थायी पर्यटन सूचना केंद्र संचालित है। पर्यटन विभाग ने पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पटना के पुनपुन में भी एक पर्यटन सूचना केंद्र की स्थापना की है। पुनपुन में पिंडदान और तर्पण की महिमा को दर्शाने के लिए लेजर शो का भी आयोजन किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा अनुभव होगा।

पितृपक्ष और पिंडदान का महत्व

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद भी आत्मा इस भौतिक जगत में विचरण करती रहती है। पिंडदान करने से उस आत्मा को इस लोक से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष को प्राप्त कर लेती है। बिना विधिपूर्वक पिंडदान किए आत्मा इस संसार में बंधी रहती है। यही कारण है कि गयाजी में पिंडदान कर आत्मा के लिए स्वर्गलोक की ओर जाने का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।

गयाजी में पिंडदान पूरे साल कभी भी किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से 15 दिवसीय पितृपक्ष पर्व के दौरान इसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गयाजी में विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और अक्षय वट जैसे पवित्र स्थानों पर पिंडदान की रस्में पूरी की जाती हैं। जिनके पास ज्यादा सामग्री उपलब्ध नहीं होती, वे भी नदी में खड़े होकर जल अर्पित कर या मिट्टी का गोला बनाकर श्रद्धापूर्वक पिंडदान कर सकते हैं।

पूर्व में गयाजी में 360 तीर्थ स्थल माने जाते थे। वर्तमान में मुख्यतः विष्णुपद मंदिर, अक्षय वट, फल्गु नदी, पुनपुन नदी, रामशिला, प्रेतशिला, ब्रह्मयोनि पहाड़ी और डाकबंगला परिसर जैसे स्थानों पर पिंडदान होता है।

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने तीर्थयात्रियों के लिए विशेष पैकेज की भी घोषणा की है, जिसमें देश भर के लोग खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अब तक 15 यात्रियों ने इस पैकेज की बुकिंग कर ली है, और लगातार बुकिंग जारी है।

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