‘ऑनलाइन कमाई’ के लालच ने ली जान : सोनू की दर्दनाक कहानी जो बन गई साइबर फ्रॉड का शिकार
मोतिहारी के एक साधारण युवक सोनू कुमार की जिंदगी उस वक्त तबाह हो गई जब वह साइबर ठगों के जाल में फंस गया। 'कमीशन' पर ऑनलाइन काम करने के झांसे में आकर उसने अपना बैंक खाता अपराधियों को सौंप दिया। जब उसके खाते में लाखों की धोखाधड़ी का पैसा आया, तो उत्तराखंड पुलिस की टीम उसके घर पहुंच गई। पुलिस की पूछताछ और साइबर गिरोह की धमकियों के बीच फंसे सोनू ने मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। यह दुखद घटना साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरे और युवाओं में जागरूकता की कमी को उजागर करती है।

मोतिहारी : यह कहानी मोतिहारी के बलुआ गोपालपुर के उस मेहनती और सीधे-सादे युवक सोनू कुमार की है, जिसने अपने परिवार के लिए उम्मीदों का चिराग बनकर अपनी जान दे दी। सोनू सिर्फ 20 साल का था और रोजगार की तलाश में था। ठीक इसी समय, उसे सोशल मीडिया पर एक लुभावना ऑफर मिला: “आसान काम करो और कमीशन कमाओ।” यह काम था बैंक खाते खुलवाना और पैसों का लेनदेन करना। सोनू ने सोचा कि यह एक सुनहरा मौका है, और वह आसानी से पैसे कमा लेगा। उसे नहीं पता था कि यह रास्ता सीधा मौत की तरफ जाता है।
आसान काम, गहरा जाल
सोनू को ऑनलाइन काम देने वाले ठगों ने उसे अपना बैंक खाता और एटीएम कार्ड उन्हें देने के लिए कहा। बदले में, उसे हर लेनदेन पर कमीशन देने का वादा किया गया। जल्द ही, सोनू के खाते में लाखों रुपये जमा होने लगे, और वह बिना कुछ सोचे-समझे पैसे निकालने लगा। वह सोच भी नहीं सकता था कि ये पैसे साइबर धोखाधड़ी के थे, जो उत्तराखंड के एक व्यक्ति के साथ हुई थी।
पुलिस की दस्तक, हताशा का सफर
जिस दिन सोनू के घर उत्तराखंड पुलिस पहुंची, उस दिन उसकी दुनिया हिल गई। पुलिस ने बताया कि उसके खाते का इस्तेमाल एक बड़े साइबर फ्रॉड में किया गया है। यह सुनकर न केवल सोनू, बल्कि उसका पूरा परिवार भी सदमे में था। एक तरफ पुलिस के सवाल और कार्रवाई का डर, दूसरी तरफ उन साइबर अपराधियों की धमकियां, जिन्होंने उसे फंसाया था।
गांव में भी इस बात की चर्चा फैल गई, और सोनू खुद को अकेला महसूस करने लगा। वह अपराधी नहीं था, लेकिन उसे अपराधी ठहराया जा रहा था। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया कि उसने उम्मीद छोड़ दी। एक दिन, जब घर में कोई नहीं था, उसने फांसी लगाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
पूरे गांव में मातम और सवाल
सोनू की मौत की खबर से पूरा इलाका सदमे में था। उसके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि उनका बेटा, जो किसी का बुरा नहीं कर सकता था, आज अपराधी के रूप में जाना जाएगा। इस घटना ने पूरे गांव में साइबर ठगी, युवाओं की सुरक्षा और जागरूकता की कमी पर एक बहस छेड़ दी है।
पुलिस का कहना है कि वे लगातार ऐसे गिरोहों पर नकेल कस रहे हैं, लेकिन जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, ऐसे मामले बढ़ते रहेंगे। सोनू की दर्दनाक कहानी एक सबक है कि ऑनलाइन लालच के पीछे छुपे खतरे कितने जानलेवा हो सकते हैं।




