बाजार में छाई लीची चित्र वाली लहठी, कारीगरों की अनोखी कला ने जीता दिल
इस बार तीज के शृंगार में छाई शाही लीची, लहठी और मिट्टी के बर्तनों पर लीची की कलाकारी
मुजफ्फरपुर. हरितालिका तीज का पर्व इस बार कुछ खास रंग लेकर आया, क्योंकि शहर की पहचान, शाही लीची, सुहागिनों के शृंगार का हिस्सा बन गई है। इस्लामपुर बाजार में लीची के चित्रों से सजी लाख की लहठी ने तीज की खरीदारी को एक नया आयाम दिया है।
लीची ने दिया ‘लीचीपुरम’ को नया नाम
यह अनोखी पहल पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता की प्रेरणा से शुरू हुई है, जो पिछले कई महीनों से जिले को लीची की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर के रूप में उभारने की मुहिम चला रहे हैं। तीज के मौके पर उन्होंने लीची की आकृति वाली लहठी और डलिया को बाजार में उतारा। बालू घाट की श्वेता श्रीवास्तव ने लाख की लहठी पर लीची की खूबसूरत कारीगरी उकेरकर महिलाओं का दिल जीत लिया। वहीं, सादातपुर के रवींद्र पंडित और उनके परिवार ने दही रखने के लिए मिट्टी के मटकों पर लीची की कला से सजावट की है, जो बाजार में खूब पसंद की जा रही है।

स्थानीय कारीगरों को मिला नया मंच
यह पहल न केवल मुजफ्फरपुर को ‘लीचीपुरम’ के रूप में नई पहचान दे रही है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को भी अपनी कला दिखाने का एक अनूठा मंच प्रदान कर रही है। दुकानदार राजेश साह ने बताया, “लीची वाली लहठी की मांग इतनी ज़्यादा है कि हमें स्टॉक बढ़ाना पड़ रहा है। यह मुजफ्फरपुर की शाही लीची को एक तरह से सलाम है।”
दुकानदारों का कहना है कि इन लहठियों की मांग न केवल बिहार में, बल्कि विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों तक भी पहुँच रही है, जो तीज और छठ जैसे पर्वों पर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना चाहते हैं। यह पहल यह साबित करती है कि मुजफ्फरपुर की लीची न सिर्फ स्वाद में, बल्कि संस्कृति और कला में भी बेमिसाल है।




