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NHRC ने गृह सचिव से पूछा आइपीएस पवन देव को कैसे मिली पदोन्नति

गृह सचिव को आदेश - कैट का स्टे क्लियर कराएं

रायपुर । गुरुवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग( NHRC) की खुली सुनवाई (open trial) में राज्य शासन को पहली बार तल्ख निर्देश सुनने पड़े। NHRC की बेंच नंबर 2 की सुनवाई सदस्या ज्योतिका कालरा कर रही थीं। उन्होंने एक महीने के भीतर कैट का स्टे क्लियर कराने का आदेश जारी किया है।यह सुनवाई रायपुर के सिविल लाइन में न्यू सर्किट हाउस में चल रही थी।

क्या है पूरा मामला:

उनकी बेंच में 6वें नंबर पर IPS, पवन देव का प्रकरण था। इसमें उन पर मुंगेली की महिला आरक्षक से यौन प्रताड़ना (sexual harassmen) का आरोप था। आरोप पर कार्यवाही नहीं होने और उसके बावजूद भी पदोन्नति किए जाने पर NHRC ने कड़ी नाराजगी जताई। इसका प्रकरण क्रमांक 135/33/0/2017 बताया गया। प्रकरण क्रमांक 135/33/0/2017 की सुनवाई में NHRC के तल्ख सूरों का राज्य सरकार को सामना करना पड़ा।

गृह सचिव से किया जवाब तलब:

NHRC की सदस्या ज्योतिका कालरा ने इस मसले पर मौजूद गृह सचिव अरुण देव गौतम से जवाब तलब किया कि-
“ये पदोन्नति कैसे दी गई है, इस मामले में FIR की क्या स्थिति है”
इस पर राज्य सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि
“ मामले में पदोन्नति पहले दी गई थी चार्जशीट बाद में दी गई है, चार्जशीट पर कैट से स्थगन मिला है”
NHRC ने निर्देश दिए-
“ छ माह हो चुके, इस मामले में कैट सुनवाई पूरी कर चुका है, आप स्थगन क्यों नहीं हटवा रहे हैं.. एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करिए”।

 

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