
NEW DELHI: भारत में क्रूज पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 18 अगस्त को मुंबई में एक अहम कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन (IPA) की संयुक्त पहल से आयोजित ‘वॉटरवेज़ टू वंडर: अनलॉकिंग क्रूज टूरिज्म’ शीर्षक से यह कार्यक्रम देश में क्रूज पर्यटन के विकास के लिए नीतिगत दिशा और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा करेगा।
कॉन्फ्रेंस में क्या-क्या होगा?
क्रूज पर्यटन को बढ़ाने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और नीतिगत पहलें।
क्रूज टर्मिनल के स्मार्ट संचालन और हरित बंदरगाह मॉडल पर विचार-विमर्श।
सांस्कृतिक और तटीय पर्यटन कार्यक्रमों पर फोकस।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की NAVIC सेल 4 द्वारा पर्यटन क्षेत्र में किए गए सुधारों की प्रस्तुति।
प्रमुख वक्ता और पैनल चर्चा
IWAI के चेयरमैन श्री विजय कुमार मुख्य भाषण देंगे। इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन के श्री विकास नरवाल, IWAI के मुख्य अभियंता श्री ए. के. बंसल और मंत्रालय के श्री ओपेश शर्मा समेत उद्योग विशेषज्ञ भी पैनल चर्चा में भाग लेंगे।
क्यों है यह कॉन्फ्रेंस खास?
यह आयोजन ‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में नवीन अवसरों, प्रगति और सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत को क्रूज पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्रूज टूरिज्म के मायने
क्रूज टूरिज्म, यानी क्रूज जहाजों के जरिए पानी पर यात्रा करना, एक तरह का पर्यटन है। यह एक ऐसा पर्यटन है जिसमें यात्री एक बड़े जहाज पर सवार होकर यात्रा करते हैं, जो एक जगह से दूसरी जगह जाते हुए कई बंदरगाहों या गंतव्यों पर रुकता है। यह यात्रा सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने के बारे में नहीं है, बल्कि इसमें जहाज पर मिलने वाली सुविधाएं और मनोरंजन भी शामिल होता है। क्रूज जहाजों पर आम तौर पर होटल, रेस्टोरेंट, स्विमिंग पूल, शॉपिंग सेंटर, कैसीनो और मनोरंजन के अन्य साधन होते हैं। क्रूज टूरिज्म समुद्री यात्रा (Ocean Cruises) और नदी यात्रा (River Cruises) दोनों तरह का हो सकता है। भारत में समुद्री क्रूज और नदी क्रूज, दोनों की अपार संभावनाएं हैं। नदी क्रूज का उदाहरण गंगा जैसी नदियों पर होने वाली यात्राएं हैं।




