
कोयला लेवी घोटाले में फंसे आईएएस समीर विश्नोई, रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। हालांकि, अदालत ने कड़ी शर्तों के साथ यह राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि आरोपी फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य में नहीं रह सकते और उन्हें जमानत के बाद अपने रहने का पता संबंधित थाने में दर्ज कराना होगा।
डबल बेंच ने लगाई कई शर्तें
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की डबल बेंच ने इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए यह जरूरी है कि आरोपी फिलहाल छत्तीसगढ़ में न रहें।
- रिहाई के बाद एक सप्ताह के भीतर राज्य से बाहर अपने निवास का पता पेश करना अनिवार्य होगा।
- सभी को अपना पासपोर्ट संबंधित अदालत में जमा करना होगा।
- आरोपी जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे और जब भी जरूरत पड़ी, एजेंसियों या ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होंगे।
जमानत के बावजूद जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे आरोपी
हालांकि चारों आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे क्योंकि उनके खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में दर्ज अन्य मामलों के कारण उन्हें अभी रिहाई नहीं मिल पाएगी।
570 करोड़ से ज्यादा का कोल स्कैम
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 570 करोड़ रुपए से ज्यादा का कोयला घोटाला किया गया। ईडी ने 36 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
ईडी का दावा है कि कोयले के परिवहन और परमिट प्रणाली में गड़बड़ियों के जरिए अवैध लेवी वसूली की गई। ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करके कोयला व्यापारियों से मोटी रकम वसूली गई। इसके पीछे तत्कालीन खनिज विभाग के संचालक और आरोपी आईएएस समीर विश्नोई का आदेश बताया जा रहा है, जो 15 जुलाई 2020 को जारी किया गया था।
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में गहराई तक फैले कथित भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। मामले की जांच अब भी जारी है।




