
साहित्य अकादेमी ने आज हिंदी के प्रख्यात कवि एवं कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को अपने सर्वोच्च सम्मान महत्तर सदस्यता से सम्मानित किया . स्वास्थ्य कारणों के चलते यह संक्षिप्त अलंकरण कार्यक्रम उनके रायपुर स्थित आवास पर किया गया. बता दे की साहित्य अकादमी का ये सबसे बड़ा सम्मान है,
यह अलंकरण साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक और सचिव के श्रीनिवासराव द्वारा प्रदान किया गया. अलंकरण प्राप्त करने के बाद विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि इस सम्मान को मेरे घर आकर देने के लिए वे साहित्य अकादेमी का आभार प्रकट करते हैं. उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि इतना बड़ा सम्मान उन्हें प्राप्त होगा. अभी तक यह सदस्यता जिन महत्त्वपूर्ण लेखकों को मिली है उनके बीच अपने को पाकर मैं बहुत खुश हूं. इस अवसर पर उन्होंने अपनी दो कविताओं का पाठ भी किया.
उनके उपन्यास नौकर की कमीज, खिलेगा तो देखेंगे, दिवार में खिड़की रहते थे, ये हिंदी श्रेष्ठ उपन्यास में शामिल है,
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि यह स्वयं को गौरवान्वित महसूस होने का दुर्लभ अवसर है क्योंकि शुक्ल जी को सम्मानित करके अकादेमी भी अपने आप को सम्मानित कर रही है. . सचिव के श्रीनिवासराव ने उनके सम्मान में प्रशस्ति पाठ करते हुए कहा कि विनोद कुमार शुक्ल कविता और गल्प का अद्भुत संयोग रचने वाले सर्जक हैं. उनकी रचनाएं किसी स्मृति के आख्यान सी मृदुल और झिलमिल करती हुई होती हैं जिन्हें पढ़कर एक विलक्षण शांति को महसूस करने का सुख प्राप्त होता है. इस नाते विनोद कुमार शुक्ल हमारे समय के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किए जाते हैं.
ज्ञात हो कि एक जनवरी 1937 को राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल ने कृषि की पढ़ाई के दौरान प्रकृति के प्रति ऐसी आत्मीयता पाई है जो आगे बढ़कर प्रकृति रक्षा और अंततः मनुष्य की प्रजाति की रक्षा में चिंतित हो जाती है. मनुष्य का जीवन और समाज बेहतर हो उनकी यही सदिच्छा ही उनकी रचनात्मकता का मूल स्वर है और केंद्रीय चिंता भी.
बता दे की विनोद कुमार शुक्ल को गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, अखिल भारतीय भवानीप्रसाद मिश्र सम्मान, सृजन भारतीय सम्मान, रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, रचना समग्र पुरस्कार एवं हिंदी गौरव सम्मान आदि कई प्रतिष्ठित सम्मानों से अलकृंत किया जा चुका है.
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